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Cipla की स्थापना 1935 में की गई और इसने भारत के दवा उद्योग को अग्रणी और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है. इसके 50 निर्माण संयंत्र हैं जो वैश्विक मानकों से बेहतर हैं और लगभग प्रत्येक बीमारी के समाधान के लिए 1,200 से अधिक उत्पादों का निर्माण करते हैं. 75 वर्षों की अवधि में शोध और विकास के क्षेत्र में इसकी लगातार नई खोजों के परिणामस्वरूप विश्व को कई नई चीज़ें मिली हैं. कंपनी ने मानव जाति की सेवा करने और अपनी मौलिक दवाओं और उपकरणों से लाखों ज़िंदगियों को सहारा देने, उनकी उन्नति और बचाव में निरंतर प्रतिबद्धता दिखाई है.
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साँस संबंधी दवा बनाने में अग्रणी के रूप में, Cipla के पास अस्थमा और अन्य साँस संबंधी बीमारियों के लिए दवाओं, ख़ुराक और उपकरणों की सबसे बड़ी श्रृंखला है. इसने भारत में क्रांतिकारी दवाओं और इन्हेलेशन थेरेपी का पथ प्रदर्शन किया है और अस्थमा के प्रबंधन में विश्व को कई नई चीज़ें दीं. उदाहरण के लिए इसके कई उपकरण इन्हेलेशन थेरेपी में रूपांतरित हुए हैं. और इसके उच्च गुणवत्ता वाले मेडिकल अपडेट और रोगी शिक्षा सामग्री डॉक्टर्स और रोगियों की मदद करते हैं.
साँस नली की बीमारियों पर ज़ोर देने के साथ ही साँस संबंधी बीमारी पर शोध और शिक्षा के लिए कंपनी द्वारा पुणे, भारत में चेस्ट रिसर्च फ़ाउंडेशन (C R F) की स्थापना भी की गई है.
इसके 75 वर्ष पूरे होने पर, पूरे विश्व के लोगों की उन्नति और सुरक्षा के लिए Cipla अपने समपर्ण की पुनः पुष्टि करती है. बीदफ़्री (Breathefree) लोगों को दी जाने वाली सेवा की दिशा में की गई एक पहल है, जिसे Cipla के शैक्षणिक अनुदान द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त है.
अधिक जानकारी के लिए www.cipla.com पर लॉग ऑन करें.
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