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कई बीमारियों की तरह अस्थमा के बारे में भी बहुत सी भ्रांतियाँ, अफ़वाह, मिथक, और ग़लत जानकारियाँ लोगों को हैं. कुछ लोग सोचते हैं कि अस्थमा संक्रामक बीमारी है. अन्य लोग मानते हैं कि अस्थमा एक मनोवैज्ञानिक बीमारी है और यह केवल मन का भ्रम है. कुछ लोग यह भी सोचते हैं कि अस्थमा गंभीर बीमारी नहीं है और इससे मृत्यु नहीं हो सकती. यहाँ हम चिकित्सा विज्ञान और वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर अस्थमा के बारे में फैली भ्रांतियों को दूर करेंगे.
मिथक
इन्हेलर्स का नियमित उपयोग आदत या व्यसन बन सकता है.
मुँह से ली जाने वाली दवाइयाँ जैसे गोलियाँ और सिरप इन्हेलेशन थेरेपी से बेहतर हैं.
इन्हेलर्स गोलियों/सिरप से अधिक महँगे होते हैं
अस्थमा के लिए साँस से ली जाने वाली दवाइयाँ/इन्हेलर्स में स्टेरॉइड्स होता है और इसलिए इनका उपयोग केवल गंभीर अस्थमा के लिए ही किया जाता है.
अस्थमा आता-जाता रहता है. यह हमेशा नहीं बना रहता है.
अस्थमा ठीक हो सकता है.
यदि आपको अस्थमा है, तो आप सामान्य जीवन नहीं जी सकते हैं.
यदि आपको अस्थमा है, तो आप व्यायाम नहीं कर सकते और खेल नहीं सकते.
पूरक और वैकल्पिक उपचार मेरे अस्थमा को नियंत्रित करने में मेरी सहायता करेंगे.
अस्थमा एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है.
गर्भवती महिला को अस्थमा इन्हेलर नहीं लेना चाहिए
पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) महँगा और उपयोग करने में कठिन है.
यदि किसी के माता-पिता को अस्थमा नहीं है तो उसे अस्थमा नहीं हो सकता.
जब आप बड़े हो जाते हैं तो आपको अस्थमा से छुटकारा मिल जाता है या बेहतर हो जाता है.
आपको अस्थमा केवल तभी है, जबकि आपको साँस लेने में तकलीफ़ होती है.
अस्थमा का दौरा अचानक आता है और तुरंत ही गंभीर बीमारी का रूप ले लेता है.
साँस द्वारा लिए जाने वाले स्टेरॉइड्स केवल ऐसे वयस्क रोगियों के लिए हैं, जिन्हें गंभीर अस्थमा है और ये बच्चों के लिए नहीं हैं.
अस्थमा के लक्षण सभी में एक समान होते हैं.
अस्थमा से किसी की मृत्यु नहीं हो सकती
मिथक:
इन्हेलर्स का नियमित उपयोग आदत या व्यसन बन सकता है.
तथ्य:
नहीं, इन्हेलर आदत नहीं बनते हैं. चूँकि आपको अपनी इन्हेलर दवाइयाँ रोज़ लेना होती हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि यह व्यसनकारी है. क्या आप दाँतों में रोज़ ब्रश करने को आदत बनाने वाला मानते हैं? या दूध पीने को? या रोज़ नहाने को? ठीक इसी प्रकार, आपके अस्थमा के लिए इन्हेलर्स का उपयोग करना एक अच्छी आदत है, जो अस्थमा पर अच्छा नियंत्रण करने में आपकी मदद करेगी. इस प्रकार इसका व्यसन होना एक अच्छी आदत है.
See how
Shivangi's mother
believes that Inhalation therapy has no side effects.
हालाँकि, यदि आपको लगता है कि आप अपनी रिलीवर (तुरंत राहत पहुँचाने वाली दवा) कुछ अधिक ही ले रहे हैं, तो इसका अर्थ यह है कि आप अपनी
कंट्रोलर दवाओं को ठीक प्रकार से नहीं ले रहे ह
ैं. सबसे अच्छा यह है कि आप अपने डॉक्टर से मिलें और वही आपको सही सलाह देगा.
मिथक:
मुँह से ली जाने वाली दवाइयाँ जैसे गोलियाँ और सिरप इन्हेलेशन थेरेपी से बेहतर हैं.
तथ्य:
नहीं, मुँह से ली जाने वाली दवाएँ इन्हेलेशन थेरेपी से बेहतर नहीं हैं और इसे सिद्ध करने के लिए पर्याप्त प्रमाण हैं. ज़्यादातर देशों में इन्हेलेशन थेरेपी ने सफलतापूर्वक ओरल (गोली और सिरप) थेरेपी का स्थान ले लिया है क्योंकि यह अस्थमा को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी, सुरक्षित और सबसे कम लागत का तरीक़ा है.
भारत में आज भी अधिकांश रोगी मुँह से दवा लेने में ही यकीन करते हैं, अर्थात् मुँह से दवा लेना ही किसी भी बीमारी के उपचार का सही और प्रमाणित तरीक़ा है. हालाँकि वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि अस्थमा की दवा लेने का सबसे अच्छा तरीक़ा साँस द्वारा दवा लेना ही है. ओरल (गोली और सिरप) थेरेपी, अर्थात् जिसमें गोलियाँ और सिरप को मुँह से लेना होता है, का असर होने में समय लगता है क्योंकि दवाइयों को पेट से रक्त में और अंत में रक्त से फेफड़ों तक पहुँचना होता है.
जबकि इन्हेलेशन थेरेपी तेज़ है क्योंकि दवा सीधे उस स्थान अर्थात् फेफड़ों में पहुँच जाती है, जहाँ इसकी ज़रूरत है.
जिस तरह से आप अपनी आँखों में इन्फ़ेक्शन होने पर आई ड्रॉप्स डालते हैं या त्वचा में घाव होने पर मलहम लगाते हैं, वैसे ही इन्हेलेशन थेरेपी एक शॉर्टकट है, जो सीधे आपके फेफड़ों में पहुँचती है और समस्या को ठीक करती है.
इसके अतिरिक्त, ओरल (गोली और सिरप) थेरेपी में, आपको मिलिग्राम में एक बड़ी ख़ुराक (इन्हेलेशन थेरेपी से क़रीब 40 गुना अधिक) की ज़रूरत होती है, जिसका अर्थ है अधिक साइड इफ़ेक्ट्स. इन्हेलेशन थेरेपी में, दवा माइक्रोग्राम में होती है और चूँकि शरीर के अन्य हिस्से में बहुत थोड़ी सी दवा पहुँच पाती है, इसलिए आप पर बहुत कम साइड इफ़ेक्ट होते हैं.
मिथक:
इन्हेलर्स गोलियों/सिरप से अधिक महँगे होते हैं
तथ्य:
नहीं, इन्हेलेशन थेरेपी गोलियों और सिरप से अधिक महँगी नहीं है. भारत में, इन्हेलर्स की विशेष क़ीमत तय की गई है जिससे कोई भी ख़रीद सके और ख़र्च प्रतिदिन केवल कुछ रुपए है. कुछ मुँह से ली जाने वाली दवाओं की लागत इन्हेलर्स से ज़्यादा है. इसके अलावा, गोलियों के कारण होने वाला नुक़सान लंबे समय का और आपकी सेहत को महँगा पड़ता है.
मिथक:
अस्थमा के लिए साँस से ली जाने वाली दवाइयाँ/इन्हेलर्स में स्टेरॉइड्स होता है और इसलिए इनका उपयोग केवल गंभीर अस्थमा के लिए ही किया जाता है.
तथ्य:
साँस के द्वारा ली जाने वाली दवाइयाँ केवल गंभीर अस्थमा रोगियों के लिए नहीं हैं. अस्थमा फेफड़ों की जलन (सूजन) की स्थिति है. फेफड़ों की जलन के लिए सबसे बेहतर उपचार स्टेरॉइड्स है, और इसे लेने का सबसे प्रभावशाली तरीक़ा इन्हेलेशन थेरेपी है. जब आप इन्हेलेशन थेरेपी लेते हैं, तो
स्टेरॉइड दवा सीधे फेफड़ों में चली जाती है और इसके सबसे कम
साइड इफ़ेक्ट्स
होते हैं.
इनहेलर्स केवल उन लोगों के लिए नहीं हैं जिन्हें गंभीर अस्थमा है. बल्कि यह उन लोगों को भी दिया जाता है जिन्हें सामान्य अस्थमा है.
देखें कि अभिभावक इस संबंध में कैसे सुनिश्चित हैं कि साँस द्वारा दवा लेने से कम से कम साइड इफ़ेक्ट होते हैं
जब स्टेरॉइड्स को गोलियों के रूप में लिया जाता है, तो ख़ुराक बहुत अधिक होती है (एक स्टेरॉइड गोली में किसी मानक स्टेरॉइड इन्हेलर से साँस द्वारा ली गई दवा का 40 गुना अधिक ख़ुराक होती है) और इसका अधिकांश भाग केवल फेफड़ों में ही नहीं, बल्कि शरीर के शेष भागों में भी पहुँचता है. स्टेरॉइड गोलियों को लंबे समय तक नियमित रूप से लेने से गंभीर साइड इफ़ेक्ट्स हो सकते हैं जैसे हड्डियों का कमज़ोर हो जाना (ऑस्टियोपोरोसिस), वज़न बढ़ना, जल्दी थक जाना, डायबिटीज़, मोतियाबिंद, सीने में जलन और अपच. इसके कारण आपको उदासी (डिप्रेशन), या मनस्थिति बदलना (मूड स्विंग्स) या चेहरे पर चर्बी (मून फेस) हो सकती है.
आपके कंट्रोलर में मौजूद स्टेरॉइड में सामान्यत: कॉर्टिकोस्टेरॉइड होता है, लेकिन यह सुरक्षित है. कॉर्टिकोस्टेरॉइड ऐसे स्टेरॉइड्स की कॉपी हैं, जो हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से बनते हैं. यह अस्थमा का सबसे सुरक्षित और प्रभावशाली उपचार है. आपको यह समझना ज़रूरी है कि ये वे स्टेरॉइड्स नहीं हैं, जिनका दुरुपयोग कुछ एथलीट्स और बॉडी बिल्डर्स द्वारा किया जाता है. हालाँकि, सभी इन्हेलर में स्टेरॉइड नहीं होता है, कुछ में तुरंत राहत देने वाली दवा शामिल होती है.
आपकी स्थितियों के अनुसार, आपका डॉक्टर कभी-कभी आपको स्टेरॉइड गोलियाँ लेने की सलाह दे सकता है. यदि ये कम समय के लिए ली जाती हैं, तो इनके बुरे असर नहीं होंगे.
मिथक:
अस्थमा आता-जाता रहता है. यह हमेशा नहीं बना रहता है.
तथ्य:
अस्थमा के लक्षण जैसे सीने में जकड़न, साँस फूलने की स्थिति, खाँसी और साँस की घरघराहट कम ज़्यादा हो सकती है परंतु अस्थमा हमेशा बना रहता है. यह एक सामान्य ग़लतफ़हमी है कि अस्थमा होता है और ठीक हो जाता है और यह कि व्यक्ति को दवाएँ केवल तभी लेना चाहिए, जब उसमें लक्षण दिखाई दें.
यह जानना ज़रूरी है, कि अस्थमा एक क्रॉनिक (लंबी अवधि की) बीमारी है, जिसके उपचार के लिए रोगी को लगातार दवाएँ लेते रहना चाहिए भले ही लक्षण दिखाई न दे रहे हों.
अस्थमा का मूल कारण फेफड़ों की हवा नलियों में होने वाली सूजन है यदि आप यह सोचकर दवाइयाँ लेना बंद कर देते हैं कि आप में लक्षण मौजूद ही नहीं हैं, तो आप स्वयं का बहुत बड़ा नुक़सान करेंगे और जब आपको दौरा पड़ेगा, तो आपको सामान्य स्थिति में आने में ज़्यादा समय लगेगा.
मिथक:
अस्थमा ठीक हो सकता है.
तथ्य:
भले ही चिकित्सा विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली हो, लेकिन दुर्भाग्यवश अस्थमा का कोई इलाज नहीं है. यहाँ तक कि होम्योपैथी, आयुर्वेद, फ़िश थेरेपी या योग भी अस्थमा ठीक नहीं कर सकते.
See how
mothers around India
moved to inhalation after trying out various alternative medicines.
हालाँकि एलोपैथी (अंग्रेज़ी दवा) में, इसका उपचार किया जा सकता है जिससे यह एकदम नियंत्रण में रहे. एसे कई प्रसिद्ध लोग जैसे फ़िल्मी सितारे, खिलाड़ी और प्रोफ़ेशनल हैं, जिन्हें अस्थमा है लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्यों को पाने में इसे कभी बाधा नहीं बनने दिया है. इसलिए यदि आपको अस्थमा है, तो इससे हार न मानें.
नियमित उपचार से अस्थमा पूरी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है.
यह याद रखें कि केवल इसलिए कि आपमें अस्थमा के बहुत सारे लक्षण नहीं हैं, यह न समझें कि आपका अस्थमा ठीक हो गया है.
मिथक:
यदि आपको अस्थमा है, तो आप सामान्य जीवन नहीं जी सकते हैं.
तथ्य:
अपने अस्थमा के बावजूद आप सक्रिय और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं. यदि आपको या आपके बच्चे को अस्थमा है, तो आप निश्चिंत रहें कि आप यथासंभव एक सामान्य जीवन बिता सकेंगे. यदि आप या आपका बच्चा अपने डॉक्टर की सलाह मानते हैं, अस्थमा के बारे में स्वयं जानने की कोशिश करते हैं, डॉक्टर के बताए अनुसार अपनी साँस से ली जाने वाली
दवाएँ सही तरीक़े स
े लेते हैं, और अपने ट्रिगर्स से बचते हैं, तो कोई कारण नहीं है कि अस्थमा आपके सपनों, और जीवन के रास्ते में बाधा बन सके. कई सफल पुरुष और महिलाओं को – जिनमें फ़िल्मी सितारे, राजनेता, व्यावसायिक हस्तियाँ, डॉक्टर, क्रिकेट खिलाड़ी, और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता शामिल हैं, अस्थमा है और फिर भी वे सामान्य, सक्रिय जीवन जी रहे हैं.
मिथक:
यदि आपको अस्थमा है, तो आप व्यायाम नहीं कर सकते और खेल नहीं सकते.
तथ्य:
अस्थमा होने पर भी आप व्यायाम कर सकते हैं और खेल सकते हैं, लेकिन आपको नियमित रूप से अपनी दवाएँ लेना चाहिए. तैराकी अस्थमा के लिए अच्छी चीज़ है. इसके विपरीत, सूखे स्थान पर व्यायाम करना अच्छा है. ठंडी हवा कुछ लोगों के लिए ट्रिगर हो सकती है. यह ज़रूरी है कि आप डॉक्टर के निर्देशानुसार नियमित रूप से अपनी कंट्रोलर दवा लते रहें. कुछ अस्थमा रोगियों को व्यायाम करने के पहले रिलीवर (तुरंत राहत पहुँचाने वाली दवा) का उपयोग करने से लाभ होता है. इसलिए अपना रिलीवर (तुरंत राहत पहुँचाने वाली दवा) हमेशा अपने साथ रखें. सुरक्षा के लिए,
अतिरिक्त दवा अपने साथ रखना न भूलें.
अपने टीम के सदस्यों, अपने दोस्तों, अपने जिम इंस्ट्रक्टर, या अपने कोच को यह बताना न भूलें कि आपको
दौरा
आने की स्थिति में उन्हें क्या करना चाहिए.
अस्थमा के लिए सबसे अच्छे व्यायाम योग और खेल जैसे तैराकी और कुछ दूर तक तेज़ गति से चलना होते हैं क्योंकि इनमें लगातार दौड़ना नहीं पड़ता है और आपको बीच में आराम करने के लिए समय मिल जाता है. यदि आप व्यायाम और खेल के प्रति गंभीर हैं, तो नियमित रूप से अपने डॉक्टर से संपर्क करें.
अपने सपनों के रास्ते में अस्थमा को बाधा ना बनने दें. यह किसी को खेल या जीवन में विजेता बनने से रोकता नहीं है. बड़े-बड़े क्रिकेट खिलाड़ियों को और तैराकों को अस्थमा है और आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि कई ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेताओं को भी अस्थमा है.
मिथक:
पूरक और वैकल्पिक उपचार मेरे अस्थमा को नियंत्रित करने में मेरी सहायता करेंगे.
तथ्य:
नहीं! होम्योपैथी, आयुर्वेद, हर्बल थेरेपी, एक्यूपंक्चर और फ़िश थेरेपी जैसे पूरक/वैकल्पिक उपचारों से अस्थमा नियंत्रित करने पर आपको फ़ायदा नहीं होगा. ऐसा कोई डेटा उपलब्ध नहीं है जो यह सिद्ध करता हो कि ये प्रभावी हैं. शोध बताते हैं कि ये उपचार अस्थमा को नियंत्रित करने में सहायक सिद्ध नहीं हुए हैं. इसके अलावा, सुरक्षा संबंधी जानकारी के अभाव में इनमें रोगियों के लिए साइड इफ़ेक्ट्स के संबंध में कुछ जोख़िम बने रहते हैं.
कृपया ध्यान दें कि अस्थमा के दौरे में पूरक दवाएँ मदद नहीं कर सकती हैं.
वे आपके साँस द्वारा ली जाने वाली दवा के उपचार का स्थान लेने के लिए नहीं बनी हैं. इसलिए अपनी मुख्य दवाओं को न छोड़ें, भले ही आपने इनमें से किसी उपचार को आज़माने का निर्णय लिया हो. सबसे पहले अपने डॉक्टर से पूरक उपचार पर चर्चा करें और उसे लेने से पहले उसकी सलाह लें.
देखें कि किस प्रकार अस्थमा पीड़ित बच्चे के अभिभावकों ने बाहरी वैकल्पिक दवाओं का प्रयोग असफल होने के बाद साँस द्वारा ली जाने दवा को अपनाया.
मिथक:
अस्थमा एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है.
तथ्य:
नहीं, अस्थमा संक्रामक नहीं है. आपको किसी और व्यक्ति से अस्थमा नहीं हो सकता, और घर या ऑफ़िस में कोई दूसरा इससे संक्रमित नहीं हो सकता.
मिथक:
गर्भवती महिला को अस्थमा इन्हेलर नहीं लेना चाहिए
तथ्य:
यदि एक बच्चा अस्थमा इन्हेलर ले सकता है, तो एक गर्भवती महिला भी ले सकती है. वास्तव में, यह ज़रूरी है कि एक गर्भवती महिला नियमित रूप से अस्थमा इन्हेलर का उपयोग करती रहे ताकि उसके बच्चे के स्वस्थ पैदा होने की संभावना बनी रहे.
आज इन्हेलर बहुत सुरक्षित हैं,
यहाँ तक कि स्तनपान कराने वाली माताएँ भी बच्चे को नुक़सान पहुँचाए बिना इन्हेलर ले सकती हैं. क्योंकि साँस द्वारा ली गई दवाओं की ख़ुराक गोलियों की तुलना में 40 गुना तक कम होती है.
मिथक:
पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) महँगा और उपयोग करने में कठिन है.
तथ्य:
ठीक जैसे आपके पास ब्लड प्रेशर की जाँच करने के लिए BP रीडिंग मशीन और डायबिटीज़ की जाँच के लिए ग्लूकोमीटर होता है, वैसे ही
अस्थमा के थर्मामीटर
के रूप में पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) होता है. यह एक छोटा सा उपकरण है जिसे आसानी से इधर-उधर ले जाया जा सकता है, यूज़र फ़्रेंडली, रखरखाव और उपयोग में आसान है. आपको अपना अस्थमा नियंत्रण में रखने, उसके बारे में अनुमान लगाने और अस्थमा के दौरे को रोकने के लिए इसे सप्ताह में दो बार उपयोग करने की सलाह दी जाती है. यदि आपको अस्थमा है और पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) से आपके फेफड़ों के कार्य की जाँच करने के दौरान रीडिंग में गिरावट दिखाई देती है, तो इसका मतलब है कि आपका अस्थमा नियंत्रण में नहीं है और आपको निकट भविष्य में या कुछ दिनों में दौरा पड़ सकता है. यह ख़ुराक या दवा की मात्रा बढ़ाने की चेतावनी है. जब
पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर)
की रीडिंग सामान्य हो, तो यह संकेत है कि आपका अस्थमा नियंत्रण में है.
मिथक:
यदि किसी के माता-पिता को अस्थमा नहीं है तो उसे अस्थमा नहीं हो सकता.
तथ्य:
यदि परिवार में किसी को पहले से एलर्जी रही हो तो आपको भी अस्थमा हो सकता है, जैसे केवल अभिभावक को नहीं, बल्कि भाई-बहन, दादा-दादी, चाचा-चाची या अन्य किसी को भी. साथ ही
ट्रिगर
भी आपके अस्थमा के दौरे का कारण बन सकते हैं.
मिथक:
जब आप बड़े हो जाते हैं तो आपको अस्थमा से छुटकारा मिल जाता है या बेहतर हो जाता है.
तथ्य:
अस्थमा जीवन भर रहने वाली स्थिति है. किसी बच्चे का अस्थमा समय के साथ बेहतर या बदतर हो सकता है और कुछ बहुत छोटे बच्चों का अस्थमा उनके बड़े होने पर बेहतर हो सकता है (और उनके फेफड़े भी), लेकिन अधिकांश लोगों में, अस्थमा जीवन भर बना रहता है.
मिथक:
आपको अस्थमा केवल तभी है, जबकि आपको साँस लेने में तकलीफ़ होती है.
तथ्य:
अस्थमा पीड़ित व्यक्ति को अस्थमा हमेशा बना रहता है. यह एक क्रॉनिक (लंबी अवधि की) स्थिति है और हवा की नली में जलन (सूजन) हमेशा बनी रह सकती है, हाँ, भले ही आपमें बहुत सारे लक्षण दिखाई न दे रहे हों. इसके अलावा, ऐसे अनेक चिकित्सकीय प्रमाण मिल रहे हैं, कि हवा नलियों में सूजन का यदि उपचार नहीं किया जाए, तो इससे आपके फेफड़ों की ताक़त को स्थायी नुक़सान हो सकता है. अपनी दैनिक कंट्रोलर दवा लेकर और
अस्थमा ट्रिगर्स
से बचकर अपने अस्थमा को नियंत्रण में रखना बहुत ज़रूरी है.
मिथक:
अस्थमा का दौरा अचानक आता है और तुरंत ही गंभीर बीमारी का रूप ले लेता है.
तथ्य:
अधिकांश अस्थमा के दौरे धीरे-धीरे बढ़ते हैं – इससे व्यक्ति एक या कुछ दिनों तक असामान्य अनुभव करता है, उदाहरण के लिए, दौरा आने के पहले थोड़ा साँस फूलना, या साँस में घरघराहट होना. इसलिए सीने में जलन पर गंभीरता से निगरानी रखें, अपने लक्षणों को पहचानना सीखें (सीने में जकड़न, साँस फूलना, खाँसी और साँस की घरघराहट), यदि आवश्यक समझें तो अपने अस्थमा की दैनिक डायरी रखें, और अपने
ट्रिगर्स
के संपर्क में आने से बचें.
यह भी ज़रूरी है, कि आप अस्थमा दौरे का अनुमान लगाने
और उससे बचाव में मदद के लिए सामान्य हैंडहेल्ड पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) का उपयोग करें. यह याद रखें कि सिर्फ़ इसलिए कि आपमें अस्थमा के बहुत सारे लक्षण दिखाई नहीं दे रहे हैं, इसका यह अर्थ नहीं है कि आपका अस्थमा ख़त्म हो गया है.
मिथक:
साँस द्वारा लिए जाने वाले स्टेरॉइड्स केवल ऐसे वयस्क रोगियों के लिए हैं, जिन्हें गंभीर अस्थमा है और ये बच्चों के लिए नहीं हैं.
तथ्य:
साँस द्वारा स्टेरॉइड्स लेने की अनुशंसा स्थायी अस्थमा वाले वयस्क और बच्चों दोनों के लिए की जाती है. साँस द्वारा स्टेरॉइड का उपयोग मध्यम और गंभीर स्थायी अस्थमा रोगी बच्चों के लिए, लेकिन कम मात्रा में किए जाने की भी अनुशंसा की जाती है. इसके अलावा, साँस द्वारा लेने पर, ख़ुराक गोली और सिरप से ली जाने वाली ख़ुराक की तुलना में 40 गुना तक कम होती है. और इस तरह यह उस भाग अर्थात् फेफड़े में पहुँचती है जहाँ इसकी सबसे अधिक ज़रूरत है, इसके साइड इफ़ेक्ट बहुत कम हैं और यह हानिकारक नहीं होती.
मिथक:
अस्थमा के लक्षण सभी में एक समान होते हैं.
तथ्य:
अस्थमा हर व्यक्ति को अलग-अलग तरह से प्रभावित कर सकता है. संभव है कि किसी व्यक्ति में कई लक्षण दिखाई दें, जैसे छींक आना, सीने में जकड़न और थकान, जबकि किसी अन्य को केवल खाँसी के लक्षण हो सकते हैं. आपको अपने
लक्षण
पता होने चाहिए जिससे आपको तुरंत मदद मिल सके.
मिथक:
अस्थमा से किसी की मृत्यु नहीं हो सकती
तथ्य:
दुर्भाग्यवश, हाँ, अस्थमा से मृत्यु हो सकती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अपडेट के अनुसार, अस्थमा के कारण दुनिया भर में लगभग 2,50,000 लोगों की मृत्यु प्रतिवर्ष हो जाती है.
यदि पहली अवस्था में अस्थमा का निदान न हो, तो मृत्यु हो सकती है. या यदि रोगी को
दौरा
आने पर रिलीवर (तुरंत राहत पहुँचाने वाली दवा) तुरंत न दी जाए.
किसी रोगी को मृत्यु का ख़तरा है या नहीं, यह पहचानने का एक बेहतर तरीक़ा यह देखना है कि क्या वह रोगी अत्यधिक ब्रोंकोडिलेटर इन्हेलर ले रहा है (एक दिन में 10 पफ़ से ज़्यादा या जिसे प्रतिमाह दो या उससे अधिक इन्हेलर की ज़रूरत होती है), इससे ऐसा लगता है कि उसका अस्थमा नियंत्रण के बाहर है. ऐसे व्यक्ति को भी ख़तरा है, जिसे नेबुलाइज़ेशन के लिए लगातार अस्पताल जाना पड़ता है.
अस्थमा सभी आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित करता है, जहाँ एक ओर यह घातक है, वहीं दूसरी ओर अधिकांश मामलों में इसे नियंत्रित किया जा सकता है. अस्थमा से होने वाली अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है.
इसलिए कृपया अपने या अपने बच्चे के अस्थमा के प्रबंधन को गंभीरता से लें.
©2010 ब्रीद फ़्री (Breathe Free), सर्वाधिकार सुरक्षित.
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