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अपने अस्थमा को मापें

अस्थमा का निदान कैसे किया जाता है ?  

यदि आप या आपका कोई नज़दीकी व्यक्ति अस्थमा का रोगी है, तो परेशान होने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं है. घबराने या अपनी नौकरी अथवा शहर छोड़ने की आवश्यकता नहीं है. ओलंपिक एथलीट, मशहूर क्रिकेट खिलाड़ी, कलाकार, राजनेता भी अस्थमा के शिकार होते हैं, लेकिन वे इसकी वजह से उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित नहीं होने देते.

अपने अस्थमा को नियंत्रण में रखने के लिए अपने ट्रिगर्स को पहचानना, अपने लक्षणों पर ध्यान रखना और अपनी दवाएँ सही तरीक़े से लेना महत्वपूर्ण है. लेकिन सबसे पहले इसका सही तरीक़े से निदान होना ज़रूरी है.

हमारे देश में, कई अभिभावक यह स्वीकार नहीं करते कि उनके बच्चे को अस्थमा है. वे ‘अस्थमा’ शब्द के बजाय यह सुनना पसंद करेंगे कि उनके बच्चे को ‘व्हीज़िंग ब्रोंकाइटिस’ या ‘एलर्जिक ब्रोंकाइटिस’ है. वे बच्चे को लेकर इस डॉक्टर से उस डॉक्टर के पास जाते रहते हैं जिससे बच्चे की तकलीफ़ बढ़ जाती है और उन्हें भी बहुत अधिक तनाव का सामना करना पड़ता है, वास्तव में यदि अस्थमा का जल्दी पता लगा लिया जाए और समय पर उपचार शुरू हो जाए, तो जल्दी ही उनका बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है. बच्चे को बच्चा ही रहना चाहिए और यदि किसी अस्थमा पीड़ित बच्चे का उपचार सही ढंग से किया जाए तो वह सब कुछ कर सकता है जो कि एक सामान्य बच्चा करता है – नियमित स्कूल जाना, खेलना, और हाँ यहाँ तक कि आइसक्रीम भी खाना! (रोगी की फ़िल्मों के लिए यहाँ क्लिककरें)

अस्थमा का पता लगाना आसान है लेकिन कई बार इसे ग़लती से बार-बार होने वाली खाँसी समझ लिया जाता है और इसलिए इसे गंभीरता से नहीं लिया जाता या समय पर इलाज नहीं किया जाता है या कफ़ सिरप से उपचार किया जाता है. प्राय:, अस्थमा पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है. अपने या अपने बच्चे के अस्थमा के निदान में अपने डॉक्टर की मदद करने के लिए, जहाँ तक संभव हो आपको अपने डॉक्टर के प्रश्नों का सही जवाब देना चाहिए. प्रश्न आपके लक्षणों, आपके पारिवारिक इतिहास, आपके द्वारा ली जाने वाली दवाइयों, आपकी एलर्जी आदि के बारे में होंगे. इसे मेडिकल हिस्ट्री कहा जाता है. बहुत से निदान मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर होते हैं. डॉक्टर भी एक शारीरिक जाँच का प्रबंध करेगा और आपसे कुछ जाँच जैसे पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) और स्पाइरोमीटरी जाँच करने की अनुशंसा की जाती है.

यदि अस्थमा का पता चलता है, तो फिर इसे नियंत्रित करने के लिए आपको उचित उपचार शुरू करना होगा. आपके अस्थमा पर नियंत्रण रखने का एक सबसे महत्वपूर्ण काम है उस पर निगरानी रखना, जिसका मतलब है कि आप इस बात की जाँच करते रहें कि आपके अस्थमा में सुधार हो रहा है या नहीं या उसकी स्थिति और ख़राब होती जा रही है. इससे आपके डॉक्टर को यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि कौन-सी दवाएँ देनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर कब ख़ुराक बदलनी है. और अधिक जानकारी के लिए, पढ़ना जारी रखें









पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर)   

पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) सामान्य, बहुत ज़्यादा महँगा नहीं और हाथ से चलने वाली मशीन है जो बच्चों और वयस्कों में साँस की समस्या और अस्थमा के निदान में मदद करती है. आपके अस्थमा के इलाज के दौरान इसका उपयोग आपमें हो रहे सुधार पर नज़र रखने के लिए भी इंस्ट्रूमेंट की तरह किया जाता है.

जैसे आपके पास ब्लड प्रेशर की जाँच करने के लिए BP इंस्ट्रूमेंट, और शुगर की जाँच के लिए ग्लूकोमीटर होता है, उसी प्रकार, अस्थमा के लिए पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) थर्मामीटर जैसा है. एक रोगी के रूप में, आपको मशीन के माउथपीस में फूँकना होगा, और आपके फेफड़े की ताक़त का पता लगाने के लिए रीडिंग ले ली जाएगी. अधिकांश डॉक्टरों के क्लीनिक में यह मशीन होती है लेकिन यदि आप अपने अस्थमा की जाँच करना चाहते हैं, तो यह सभी प्रमुख दवा की दुकानों में भी उपलब्ध होती है.


यदि आपको अस्थमा है, तो वास्तव में आपमें सुधार हो रहा है या नहीं यह मापने के लिए आप पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) का उपयोग कर सकते हैं. आपका डॉक्टर आपको दिखाएगा कि पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) में कौन सा नंबर या रीडिंग आपकी उम्र और ऊँचाई के अनुसार आपके लिए ठीक या सामान्य है. यदि रीडिंग में किसी तरह की कमी आती है, तो इसका मतलब है कि आपका अस्थमा नियंत्रण में नहीं है और आपको निकट भविष्य में या कुछ दिनों में दौरा पड़ सकता है. यह ख़ुराक या दवा लेने की संख्या बढ़ाने के पहले की चेतावनी है. यदि नंबर पिछली रीडिंग से ज़्यादा है, तो इसका मतलब है कि आपका अस्थमा नियंत्रण में है और आपमें सुधार हो रहा है. यदि पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) की रीडिंग सामान्य (आँकड़ा आपको आपका डॉक्टर बता देगा) हो, तो इससे यह पता चलता है कि आपका अस्थमा नियंत्रण में है.









स्पाइरोमीटरी जाँच   

स्पाइरोमीटरी जाँच अधिक संवेदनशील और अत्याधुनिक जाँच है जिससे अस्थमा के लक्षणों का जल्दी पता लग जाता है. स्पाइरोमीटर का उपयोग यह मापने के लिए किया जाता है कि आपके फेफड़े कितनी हवा ले सकते हैं और कितनी आसानी से हवा आपके फेफड़ों में आती और जाती है. दूसरे शब्दों में, यह आपके फेफड़ों की ताक़त का अच्छा संकेत देता है और आपकी साँस लेने की क्षमता के बारे में सही-सही बताता है. जाँच आयोजित करने वाली लैब या डॉक्टर द्वारा आपको आपकी रीडिंग का एक प्रिंट किया हुआ ग्राफ़ दिया जाएगा, ठीक उसी तरह से जैसे आपको अपना ईसीजी परीक्षण कराने पर मिलता है.

पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) और स्पाइरोमीटरी जाँच दोनों ही अस्थमा के निदान में उपयोग किए जाते हैं और जब आपका अस्थमा नियंत्रण में हो तो आपमें हुए सुधार को मापने में भी मदद करते हैं.

हालाँकि, 6 साल से कम उम्र के बच्चों को इन जाँचों की सलाह नहीं दी जाती है, एक अभिभावक के रूप में यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपके पारिवारिक इतिहास और ट्रिगर्स पर गंभीरता से ध्यान देते हुए, आपके बच्चे के अस्थमा का निदान जल्दी और सही ढंग से कर लिया गया है, आपको अपने शिशु रोग विशेषज्ञ के साथ मिलकर काम करना होगा. आपको भी अपने डॉक्टर के पास नियमित रूप से जाना चाहिए ताकि साथ में आप भी अपने बच्चे के विकास पर निगरानी रख सकें.




 
पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर)   
पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) सामान्य, बहुत ज़्यादा महँगा नहीं और हाथ
से चलने वाली मशीन है....
स्पाइरोमीटरी जाँच   
स्पाइरोमीटरी जाँच अधिक संवेदनशील और अत्याधुनिक जाँच है जिससे
अस्थमा के लक्षणों...