अब यदि आपको स्वयं अस्थमा है या आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं, जो इससे पीड़ित है, तो सबसे पहला कार्य आप यह करें: चिंता न करें. आप अकेले नहीं हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) के अनुसार लगभग 300 मिलियन लोग आज अस्थमा के शिकार हैं. अस्थमा बच्चों में होने वाली सबसे सामान्य गंभीर (लंबी अवधि की) बीमारी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट यह भी बताती है कि अस्थमा से प्रभावित लगभग 25-30 मिलियन लोग अकेले भारत में हैं.
जहाँ पहले, अस्थमा के साथ बहुत सी भ्रांतियाँ जुड़ी हुई थीं, आजकल बीमारी के बारे में बेहतर जानकारी और आधुनिक दवाओं के फलस्वरूप आप अस्थमा के बावजूद एक सामान्य, सक्रिय जीवन जी सकते हैं. फ़िल्मी सितारों को अस्थमा है, क्रिकेट खिलाड़ियों को अस्थमा है, प्रमुख व्यावसायिक हस्तियों को अस्थमा है, लेकिन उन्होंने इसे उनकी सफलता के मार्ग में बाधक नहीं बनने दिया. अतः कोई कारण नहीं है, कि आप अस्थमा को अपने या अपने लाड़ले के जीवन का भरपूर आनंद लेने में बाधा बनने दें.
अस्थमा के सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:
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सीने में जकड़न: सीने में कसाव का अनुभव, जैसे कोई उसे ज़ोर से दबा रहा है या उस पर बैठा है. |
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साँस फूलना: साँस फूलने की स्थिति अर्थात् ऐसा अनुभव कि आपके फेफड़ों के भीतर और बाहर पर्याप्त साँस नहीं मिल पा रही है. साँस छोड़ने में विशेष रूप से कठिनाई होती है. |
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बार-बार आने वाली या लंबे समय तक चलने वाली खाँसी: ऐसी खाँसी जो ख़त्म न हो. खाँसी प्रायः रात में या व्यायाम के बाद आती हो. |
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साँस की घरघराहट: एक सीटी जैसी आवाज़ जो साँस बाहर छोड़ने पर सुनाई देती है. |
अन्य लक्षण:
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रात को खाँसी के कारण नींद न आना |
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व्यायाम के समय साँस फूलने की स्थिति |
कृपया ध्यान दें: अस्थमा के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग होते हैं. कुछ में सभी लक्षण मौजूद हो सकते हैं, जबकि अन्य में केवल खाँसी या साँस की घरघराहट हो सकती है. अपने लक्षणों पर विशेष ध्यान रखें और अपनी स्थिति का सही-सही पता लगाने के लिए अपने डॉक्टर से उनके बारे में चर्चा करें. और यह ध्यान रखें कि सही उपचार से आप अपने अस्थमा के लक्षणों को नियंत्रित कर सकते हैं.
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अस्थमा का निदान कैसे किया जाता है ?
यदि आप या आपका कोई नज़दीकी व्यक्ति अस्थमा का रोगी है, तो परेशान होने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं है. घबराने या अपनी नौकरी अथवा शहर छोड़ने की आवश्यकता नहीं है. ओलंपिक एथलीट, मशहूर क्रिकेट खिलाड़ी, कलाकार, राजनेता भी अस्थमा के शिकार होते हैं, लेकिन वे इसकी वजह से उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित नहीं होने देते.
अपने अस्थमा को नियंत्रण में रखने के लिए अपने ट्रिगर्स को पहचानना, अपने लक्षणों पर ध्यान रखना और अपनी दवाएँ सही तरीक़े से लेना महत्वपूर्ण है. लेकिन सबसे पहले इसका सही तरीक़े से निदान होना ज़रूरी है.
हमारे देश में, कई अभिभावक यह स्वीकार नहीं करते कि उनके बच्चे को अस्थमा है. वे ‘अस्थमा’ शब्द के बजाय यह सुनना पसंद करेंगे कि उनके बच्चे को ‘व्हीज़िंग ब्रोंकाइटिस’ या ‘एलर्जिक ब्रोंकाइटिस’ है. वे बच्चे को लेकर इस डॉक्टर से उस डॉक्टर के पास जाते रहते हैं जिससे बच्चे की तकलीफ़ बढ़ जाती है और उन्हें भी बहुत अधिक तनाव का सामना करना पड़ता है, वास्तव में यदि अस्थमा का जल्दी पता लगा लिया जाए और समय पर उपचार शुरू हो जाए, तो जल्दी ही उनका बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है. बच्चे को बच्चा ही रहना चाहिए और यदि किसी अस्थमा पीड़ित बच्चे का उपचार सही ढंग से किया जाए तो वह सब कुछ कर सकता है जो कि एक सामान्य बच्चा करता है – नियमित स्कूल जाना, खेलना, और हाँ यहाँ तक कि आइसक्रीम भी खाना!
अस्थमा का पता लगाना आसान है लेकिन कई बार इसे ग़लती से बार-बार होने वाली खाँसी समझ लिया जाता है और इसलिए इसे गंभीरता से नहीं लिया जाता या समय पर इलाज नहीं किया जाता है या कफ़ सिरप से उपचार किया जाता है. प्राय:, अस्थमा पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है. अपने या अपने बच्चे के अस्थमा के निदान में अपने डॉक्टर की मदद करने के लिए, जहाँ तक संभव हो आपको अपने डॉक्टर के प्रश्नों का सही जवाब देना चाहिए. प्रश्न आपके लक्षणों, आपके पारिवारिक इतिहास, आपके द्वारा ली जाने वाली दवाइयों, आपकी एलर्जी आदि के बारे में होंगे. इसे मेडिकल हिस्ट्री कहा जाता है. बहुत से निदान मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर होते हैं. डॉक्टर भी एक शारीरिक जाँच का प्रबंध करेगा और आपसे कुछ जाँच जैसे पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) और स्पाइरोमीटरी जाँच करने की अनुशंसा की जाती है.
पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर)
पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) सामान्य, बहुत ज़्यादा महँगा नहीं और हाथ से चलने वाली मशीन है जो बच्चों और वयस्कों में साँस की समस्या और अस्थमा के निदान में मदद करती है. आपके अस्थमा के इलाज के दौरान इसका उपयोग आपमें हो रहे सुधार पर नज़र रखने के लिए भी इंस्ट्रूमेंट की तरह किया जाता है.
जैसे आपके पास ब्लड प्रेशर की जाँच करने के लिए BP इंस्ट्रूमेंट, और शुगर की जाँच के लिए ग्लूकोमीटर होता है, उसी प्रकार, अस्थमा के लिए पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) थर्मामीटर जैसा है. एक रोगी के रूप में, आपको मशीन के माउथपीस में फूँकना होगा, और आपके फेफड़े की ताक़त का पता लगाने के लिए रीडिंग ले ली जाएगी. अधिकांश डॉक्टरों के क्लीनिक में यह मशीन होती है लेकिन यदि आप अपने अस्थमा की जाँच करना चाहते हैं, तो यह सभी प्रमुख दवा की दुकानों में भी उपलब्ध होती है.
यदि आपको अस्थमा है, तो वास्तव में आपमें सुधार हो रहा है या नहीं यह मापने के लिए आप पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) का उपयोग कर सकते हैं. आपका डॉक्टर आपको दिखाएगा कि पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) में कौन सा नंबर या रीडिंग आपकी उम्र और ऊँचाई के अनुसार आपके लिए ठीक या सामान्य है. यदि रीडिंग में किसी तरह की कमी आती है, तो इसका मतलब है कि आपका अस्थमा नियंत्रण में नहीं है और आपको निकट भविष्य में या कुछ दिनों में दौरा पड़ सकता है. यह ख़ुराक या दवा लेने की संख्या बढ़ाने के पहले की चेतावनी है. यदि नंबर पिछली रीडिंग से ज़्यादा है, तो इसका मतलब है कि आपका अस्थमा नियंत्रण में है और आपमें सुधार हो रहा है. यदि पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) की रीडिंग सामान्य (आँकड़ा आपको आपका डॉक्टर बता देगा) हो, तो इससे यह पता चलता है कि आपका अस्थमा नियंत्रण में है.
स्पाइरोमीटरी जाँच
स्पाइरोमीटरी जाँच अधिक संवेदनशील और अत्याधुनिक जाँच है जिससे अस्थमा के लक्षणों का जल्दी पता लग जाता है. स्पाइरोमीटर का उपयोग यह मापने के लिए किया जाता है कि आपके फेफड़े कितनी हवा ले सकते हैं और कितनी आसानी से हवा आपके फेफड़ों में आती और जाती है. दूसरे शब्दों में, यह आपके फेफड़ों की ताक़त का अच्छा संकेत देता है और आपकी साँस लेने की क्षमता के बारे में सही-सही बताता है. जाँच आयोजित करने वाली लैब या डॉक्टर द्वारा आपको आपकी रीडिंग का एक प्रिंट किया हुआ ग्राफ़ दिया जाएगा, ठीक उसी तरह से जैसे आपको अपना ईसीजी परीक्षण कराने पर मिलता है.
पीक फ़्लो मीटर (ब्रीदोमीटर) और स्पाइरोमीटरी जाँच दोनों ही अस्थमा के निदान में उपयोग किए जाते हैं और जब आपका अस्थमा नियंत्रण में हो तो आपमें हुए सुधार को मापने में भी मदद करते हैं.
हालाँकि, 6 साल से कम उम्र के बच्चों को इन जाँचों की सलाह नहीं दी जाती है, एक अभिभावक के रूप में यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपके पारिवारिक इतिहास और ट्रिगर्स पर गंभीरता से ध्यान देते हुए, आपके बच्चे के अस्थमा का निदान जल्दी और सही ढंग से कर लिया गया है, आपको अपने शिशु रोग विशेषज्ञ के साथ मिलकर काम करना होगा. आपको भी अपने डॉक्टर के पास नियमित रूप से जाना चाहिए ताकि साथ में आप भी अपने बच्चे के विकास पर निगरानी रख सकें.
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ट्रिगर ऐसी कोई चीज़ है, जो फेफड़ों की हवा नलियों को इरिटेट (उत्तेजित) करती है और अस्थमा के लक्षणों का कारण बनती है. हर व्यक्ति का अस्थमा अलग होता है, और संभव है कि आपके अस्थमा का कारण एक से अधिक ट्रिगर्स हों. आपका ट्रिगर धूल के कीटाणु और पालतू जानवरों से लेकर प्रदूषण और पराग कण तक कुछ भी हो सकता है. यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने ट्रिगर्स का पता लगा लें और फिर उनसे बचने की हरसंभव कोशिश करें. चूँकि अस्थमा को नियंत्रित किया जा सकता है और आप एक सामान्य जीवन जी सकते हैं.
आपके किसी विशेष ट्रिगर की पहचान करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है परंतु कभी-कभी इनकी पहचान करना आसान होता है. उदाहरण के लिए जब आपके लक्षण किसी बिल्ली या कुत्ते या पक्षी के संपर्क में आने के कुछ ही मिनट के अंदर शुरू हो जाते हैं. या आपमें लक्षण तब शुरू होते हैं, जब हवा पटाखों के धुएँ से प्रदूषित हो. संभव है कि आप हवा में घुली किसी चीज़ के प्रति एलर्जिक हों, जो आपकी हवा नलियों को इरिटेट (उत्तेजित) करती हो और दौरे का कारण बनती हो.
अस्थमा का शिकार होने का सबसे अधिक ख़तरा आस-पास के वातावरण में मौजूद साँस के द्वारा खींचे गए पदार्थ और कण होते हैं जो एलर्जिक रिएक्शंस (प्रतिक्रिया) का कारण बन सकते हैं या हवा नलियों को इरिटेट (उत्तेजित) करते हैं जैसे घरेलू धूल-कण, तंबाकू का धुआँ, कार्यस्थल पर मौजूद रासायनिक उत्तेजक पदार्थ ( उदाहरण के लिए कोयला, सीमेंट, पेंट, एस्बेस्टस, माइनिंग, शुगर, कीटनाशक दवाइयाँ आदि उद्योग), वायु प्रदूषण और बाहरी एलर्जेंट्स जैसे पराग कण. उन लोगों के लिए भी बहुत अधिक ख़तरा होता है, जो सँकरी जगहों या सीलनभरी चारदीवारी में रहते हैं और भोजन बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली लकड़ी के धुएँ के संपर्क में रहते हैं.
यहाँ कुछ सामान्य ट्रिगर्स और अस्थमा के दौरे से बचने के लिए उपयोगी सुझाव दिए गए हैं.
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घरेलू धूल के कीटाणु:
घरेलू धूल के कीटाणु सबसे सामान्य ट्रिगर हैं. ये वे छोटे कीटाणु होते हैं, जो कारपेट्स, मैट्रेसेस, सोफा, परदों, और यहाँ तक कि सॉफ़्ट खिलौनों में रहने वाली धूल में रहते और पनपते हैं.
उपयोगी सुझाव: यदि संभव हो, तो कारपेट्स का उपयोग न करें और नियमित रूप से वैक्यूम (साफ़) कराएँ. यदि आप स्वयं अस्थमा के शिकार हैं, तो किसी अन्य से सफ़ाई करवाएँ या उस समय करवाएँ जब आप घर पर न हों. यदि आपके बच्चे को अस्थमा है, तो घर की सफ़ाई उस समय करवाएँ जब वह स्कूल में हो. सभी सॉफ़्ट खिलौनों को बिस्तर से हटा दें.
हर 2 हफ़्तों में सॉफ़्ट खिलौनों को धोकर और उन्हें धूप में सुखाएँ.
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पालतू जानवर:
पालतू जानवर अस्थमा लक्षणों के सबसे सबसे सामान्य ट्रिगर हैं. उनके बाल, पंख, लार, चमड़ी की परतें, या मूत्र अस्थमा के लक्षणों का कारण बन सकते हैं.
उपयोगी सुझाव: बाल वाले और पंख वाले पालतू जानवर न पालें. उन्हें अपने मुख्य रहने और सोने के स्थानों से दूर रखें.
यदि आप पालतू जानवर रखना ही चाहते हैं, तो इनके स्थान पर मछलियाँ रखें.
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धूम्रपान और वायु प्रदूषक:
अधिकांश समय हम प्रदूषित हवा में साँस लेते हैं जो अस्थमा लक्षणों को ट्रिगर कर सकती है. सिगरेट का धुआँ, कार के एक्ज़ॉस्ट से आने वाले धुएँ के कण, पटाखों का धुआँ, जलाऊ लकड़ी का धुआँ... आदि में ऐसे कई कण होते हैं, जो हवा नलियों को इरिटेट (उत्तेजित) कर सकते हैं.
उपयोगी सुझाव: यदि आपको अस्थमा है, तो धूम्रपान बंद कर दें. यह आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. धूम्रपान करने वालों से विनम्रतापूर्वक धूम्रपान न करने का निवेदन करें, यहाँ तक कि पैसिव स्मोकिंग भी आपके लिए हानिकारक है. यदि आपके परिवार का कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है, तो उससे बाहर धूम्रपान करने का अनुरोध करें क्योंकि सिगरेट का धुआँ परदों, कारपेट्स के अंदर चला जाता है और लंबे समय तक इसमें भरा रहता है.
जब प्रदूषण अपने उच्चतम स्तर पर हो, तो उस समय यात्रा करने से बचें.
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आपका व्यवसाय/कार्यस्थल:
आपका कार्य या कार्यस्थल कभी-कभी ट्रिगर का कारण बन सकता है. आभूषण का व्यवसाय करने वाले लोग, प्रिंटिंग, कीटनाशक दवाइयों, खदान, पेंटिंग और प्लास्टिक उद्योग में कार्य करने वाले लोग, रसोइए और बेकर्स, सॉल्डरर्स और मेटल प्लेटर्स, फ़ोम का काम करने वाले और स्प्रे पेंटर्स, हेयर ड्रेसर्स और कारपेंटर्स को अस्थमा होने की अधिक संभावना रहती है. शायद यह कुछ रसायनों की गंध या हवा में मौजूद कणों का प्रभाव है, जो फेफड़ों में इरिटेशन (उत्तेजना) का कारण बनते हैं.
उपयोगी सुझाव: उपयुक्त सावधानियाँ बरतें, अपना कंट्रोलर सही तरीक़े से और नियमित रूप से लें, और हाँ अपने डॉक्टर से संपर्क करें, जो आपको सबसे बढ़िया सलाह दे सकता है.
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सर्दी और वायरस:
सर्दी और वायरल इन्फ़ेक्शन अस्थमा के सबसे सामान्य ट्रिगर्स हैं. चूँकि कभी न कभी हर व्यक्ति को सर्दी होती है या कोई न कोई सर्दी से पीड़ित होता ही है, अत: इससे पूरी तरह से बचना असंभव है.
उपयोगी सुझाव: अच्छा खाएँ, स्वस्थ रहें. जितनी बार संभव हो अपने हाथ धोएँ. अपनी अंगुलियों से अपना चेहरा न छुएँ.
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मनोभाव:
तीव्र भावनाएँ, तनाव और यहाँ तक कि बहुत अधिक हँसने के कारण भी अस्थमा ट्रिगर हो सकता है.
उपयोगी सुझाव: अपना तनाव कम करें और जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण अपनाएँ.
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व्यायाम:
अस्थमा के रोगी सहित हम सभी के लिए व्यायाम करना अच्छा है. परंतु व्यायाम के दौरान या उसके बाद कुछ लोगों की साँस अन्य की अपेक्षा अधिक फूल जाती है. यदि आपका अस्थमा नियंत्रण में है, तो आपको व्यायाम करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए. हालाँकि यदि रोग के लक्षण अधिक बढ़ जाते हैं, तो कृपया अपने डॉक्टर से संपर्क करें.
उपयोगी सुझाव: अस्थमा के लिए सबसे अच्छे व्यायाम योग और खेल जैसे तैराकी, हॉकी, क्रिकेट, फ़ुटबॉल हैं क्योंकि इनमें लगातार दौड़ना नहीं पड़ता है और आपको बीच में थोड़ा आराम मिल जाता है.
व्यायाम करने या जिम जाने से पहले अपने फ़ेमिली डॉक्टर से संपर्क करें. अपने जिम इंस्ट्रक्टर या स्कूल के स्पोर्ट्स कोच को अपने अस्थमा के बारे में और अपनी रिलीवर (तुरंत राहत पहुँचाने वालीदवा) या रेस्क्युअर (बचाव दवाओं) के बारे में बताएँ. अपनी दवाएँ उन पर लिखे हुए निर्देशों के साथ हमेशा अपने पास रखें और अतिरिक्त रिलीवर (तुरंत राहत पहुँचाने वाली दवा)/रेस्क्युअर (बचाव की दवा ) अपनी पहुँच में रखें.
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खान-पान:
अस्थमा के शिकार अधिकांश लोगों को बहुत ज़्यादा परहेज़ नहीं करना पड़ता, परंतु कुछ लोगों को नट्स (Mungfali ), अंडा, मछली, गाय के दूध, शैल मछली, खमीर के उत्पाद, कुछ खाद्य रंग, प्रिज़र्वेटिव, शराब, गैसीय पेय से एलर्जी हो सकती है.
उपयोगी सुझाव:प्रिज़र्वेटिव खाद्य पदार्थ और डिब्बाबंद कृत्रिम खाद्य पदार्थों से परहेज़ करें. यह भी जाँच करें कि आपको नट्स, अंडे, गाय का दूध, शैल मछली और खमीर वाले उत्पाद से एलर्जी तो नहीं है. डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों पर छोटे अक्षरों में लिखी बातों को ध्यानपूर्वक पढ़ें.
एलर्जी जाँच के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें.
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हारमोंस:
हाँ, हारमोंस भी विशेषकर महिलाओं में अस्थमा ट्रिगर हो सकते हैं. कुछ में उनके यौवनारंभ के दौरान, उनके पीरिएड्स के पहले, गर्भावस्था के दौरान और मेनोपॉज़ के समय अस्थमा के लक्षण अनुभव हो सकते हैं.
उपयोगी सुझाव: यदि आपको ऐसा महसूस होता है कि हारमोंस आपके लक्षणों को ट्रिगर कर सकते हैं, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें.
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दवाइयाँ:
कुछ दवाइयाँ लक्षणों को ट्रिगर कर सकती हैं. इनमें फ़्लू, हृदय समस्याओं, ग्लूकोमा आदि की दवाइयाँ शामिल हैं.
उपयोगी सुझाव: अपने डॉक्टर से संपर्क करें और उसे अपनी वर्तमान में चल रही दवाइयों के संबंध में बताएँ.
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फफूँद, कवक, और पराग कण:
फूल वाले पौधे जो पराग कण छोड़ते हैं, वे भी लक्षणों को ट्रिगर कर सकते हैं. आपको सीलन वाली दीवारों, नमीयुक्त कपड़ों, गीले बाथरूम और बगीचे में गिरने वाली सड़ी हुई पत्तियों के ढेरों पर भी फफूँद का ध्यान रखना चाहिए.
उपयोगी सुझाव: आपका घर पर्याप्त हवादार होना चाहिए. यह सुनिश्चित करें, कि आपके घर की दीवारों में सीलन न हो.
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मौसम:
तापमान में अचानक होने वाला बदलाव, आँधी वाले दिन, गर्म नमी वाले दिन भी कुछ लोगों के लिए ट्रिगर के रूप में कार्य करते हैं.
उपयोगी सुझाव: कोहरे के समय सुबह जल्दी सैर के लिए न निकलें. जब तेज़ हवाएँ चल रही हों, तो चेहरे पर स्कार्फ़ बाँधकर रखें. अधिक तापमान वाली जगहों में अंदर जाने और बाहर आने से बचें..... किसी एयर कंडीशंड कमरे से बाहर के गर्म नमी वाले भाग में.
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मॉस्किटो कॉइल, रूम फ़्रेशनर्स, साफ़-सफ़ाई वाले उत्पाद:
इन उत्पादों में मौजूद रसायन कुछ लोगों के लिए ट्रिगर्स हो सकते हैं. वास्तव में, चेस्ट रिसर्च फ़ाउंडेशन (CRF), पुणे, भारत द्वारा किए गए एक स्वतंत्र शोध के अनुसार एक मॉस्किटो रिपेलॅन्ट (कॉइल) जलाने पर आप 75 से 137 सिगरेट के बराबर वायु प्रदूषक कणों के संपर्क में आते हैं!
उपयोगी सुझाव: मच्छरों से बचने के लिए अपनी खिड़कियों में जाली लगाएँ. तेज़ गंध वाले साफ़-सफ़ाई उत्पादों से बचें और अपने कमरों में कृत्रिम रूम फ़्रेशनर्स का उपयोग करने के बजाय उन्हें हवादार बनाए रखें.
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कृपया ध्यान दें: एक पुरानी कहावत है, ‘बचाव बेहतर है...’. यदि आपको अस्थमा है, तो अपने ट्रिगर्स पर पैनी नज़र रखना और उनसे बचना बेहतर उपाय है. अपने ट्रिगर्स, अपने लक्षणों और उपचार के बारे में कोई भी शंका होने पर हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें.
When you cough, particles and secretions from your lungs are cleared. So coughing is your body’s natural way to help prevent infection in your lungs.
However a cough can be annoying at times. Coughing can make you feel tired and also disturb your sleep. If your coughing is continuous and excessive, it could indicate that you have a problem in your lungs.
Coughs are generally classified based on their duration. If your cough lasts less than 3 weeks, it is termed as an acute cough. If your cough lasts longer than 8 weeks, it is defined as a chronic cough.
Causes of acute cough:
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Viral upper respiratory tract infection (cold, flu) |
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Foreign body in the airway |
Causes of chronic cough or persistent cough:
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Asthma
Asthma is a common cause of chronic cough, especially in children. Asthma-related cough may be persistent, recurrent or seasonal. It may occur after an upper respiratory infection or get worse on exposure to various triggers like dust mites, pets, smoking and air pollutants, dampness etc. Click here to know more about asthma.
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Allergic Rhinitis (Nasal Allergy)
Many patients who have asthma also have allergic rhinitis, since the nose is an extension of the respiratory tract. Usually, the nose gets affected first and then the lungs. Allergic rhinitis is a collection of symptoms which occur when one breathes in something that one is allergic to, like dust, dander, or pollen. The symptoms could be seasonal or occur all year round.
The symptoms are:
• Runny nose (persistent watery discharge from the nose)
• Sneezing
• Nasal obstruction
• Nasal itching (Itching in the nose, eyes or on the roof of the mouth)
Post nasal drip (i.e. when the watery discharge from the nose trickles down in the throat) causes irritation and leads to cough.
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Reflux Disease
Acid reflux i.e. when the acid from the stomach flows back (refluxes) into the food pipe (oesophagus). This acts as a trigger and could lead to chronic irritation and cough. |
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Infections
Chronic cough is also associated with lung infections like tuberculosis and other chronic lung diseases. It is often linked with chest pain, disturbed sleep, a hoarse voice and in some cases, blackouts, vomiting and inability to control the bladder. |
Note: Remember that many cough syrups contain harmful stimulants which can give you temporary relief and mask the lung problem. So if you are suffering from chronic cough which lasts for more than 3 weeks, consult your doctor for correct diagnosis and treatment.
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