ब्राँकाइटिस क्या है?
ब्रॉंकाइटिस तब होता है जब आपके फेफड़ों की ब्रॉंकियल
ट्यूब्स नामक नलिकाएँ (श्वसन मार्ग) सूज जाती हैं और
खाँसी पैदा करती हैं, जिसमें अक्सर बलगम निकलता है। यह
अक्सर वायरस (विषाणु) या धुएँ, धुंध, धूल और वायुप्रदूषण
जैसी आपके फेफड़ों को तकलीफ़ देने वाली कोई चीज़ साँस
द्वारा भीतर लेने से होता है।2
संक्रमण के कारण हुए ब्रॉंकाइटिस में, संक्रमण अक्सर
आपकी नाक या गले में शुरू होता है और फिर ब्रॉंकियल ट्यूब्स
में जाता है। जैसे-जैसे आपकी शरीर संक्रमण से लड़ता है,
आपकी ब्रॉंकियल ट्यूब्स में सूजन होने लगती है। इस सूजन से
आपको खाँसी होती है। कई बार, आपको सूखी खाँसी होती है,
लेकिन अक्सर आपकी खाँसी में बलगम निकलता है। सूजन
आपके श्वसन मार्ग को पतला भी कर देती है, जिससे
घरघराहट (आपका श्वसन मार्ग बंद होने पर आने वाली सीटी
जैसी तेज़ आवाज़), सीने की जकड़न और दम फूलने जैसी
समस्याएँ हो सकती हैं। समय के साथ, आपकी रोग-प्रतिकार
प्रणाली संक्रमण को दूर करेगी और आपका श्वसन मार्ग फिर
से सामान्य हो जायेगा। 2

ब्रॉंकाइटिस के प्रकार
ब्रॉंकाइटिस एक्यूट (अल्पकालिक) या क्रोनिक (दीर्घकालिक) हो सकता है। जब लोग ब्रॉंकाइटिस की बात करते हैं, तो अक्सर उनका तात्पर्य एक्यूट ब्रॉंकाइटिस से होता है। 1
एक्यूट ब्रॉंकाइटिस
सामान्य है और अक्सर वायरल (विषाणु) संक्रमण से होता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को हो सकता है। ज़्यादातर लोग कुछ दिनों या सप्ताह में ठीक हो जाते हैं। 1
बलगम के साथ या उसके बिना निरंतर खाँसी
निरंतर रहने वाली सूखी खाँसी, जो कम से कम 5 दिन तक रहती है।
लंबे समय तक या ज़ोर से खाँसने से छाती में दर्द होता है, जो अक्सर सीमित रहता है।
सुस्ती और सामान्य शारीरिक तकलीफ़।5
क्रोनिक (दीर्घकालिक) ब्रॉंकाइटिस
कम से कम तीन महीने तक रहता है और अक्सर लगातार दो साल वापस आता है। क्रोनिक (दीर्घकालिक) ब्रॉंकाइटिस के साथ साँस लेना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि श्वसन मार्गों की दीवार में सूजन रहती है और ज़्यादा बलगम का उत्पादन होता है। 1
बहुत ज़्यादा बलगम के साथ खाँसी।
खाँसी और घरघराहट के साथ, आपको आपकी छाती में हल्की तकलीफ़ महसूस हो सकती है।6
क्रोनिक ब्रॉंकाइटिस क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीस (COPD) नामक एक ज़्यादा बड़ी फेफड़े की समस्या का संकेत हो सकता है। 3
ब्राँकाइटिस के कारण
एक्यूट ब्राँकाइटिस
वायरल (विषाणुजन्य) संक्रमण, जो अक्सर सर्दी या फ्लू पैदा करने वाले विषाणु से ही होते हैं।
बैक्टीरियल (जीवाणुजन्य) संक्रमण
अक्सर, बैक्टीरिया भी एक्यूट ब्राँकाइटिस पैदा कर सकता है।
वायरल और बैक्टीरियल, दोनों ही मामलों में, शरीर की रक्षा प्रणाली अपना काम करती है। इससे ब्राँकियल ट्यूब्स में सूजन हो जाती है और संक्रमण से शरीर की लड़ाई के कारण ज़्यादा बलगम का उत्पादन होता है। इस सूजन और बलगम के उत्पादन के कारण श्वसन मार्ग पतला हो जाता है, जिससे साँस लेना मुश्किल होने लगता है।
क्रोनिक (दीर्घकालिक) ब्राँकाइटिस
वायु प्रदूषण
वायु प्रदूषण और अन्य उत्तेजक पदार्थों, जैसे रासायनिक धुएं या धूल के संपर्क में लंबे समय तक रहना
धूम्रपान
लंबे समय तक धूम्रपान, अप्रत्यक्ष रूप से सिगरेट पीना, गांजा
लेना या लंबे समय तक ई-सिगरेट का इस्तेमाल करना। 7
बायोमास (जैव ईंधन)
घर पर लकड़ी या कोयला जलाने से उठने वाले धुएँ को साँस
द्वारा भीतर लेना आपको क्रोनिक ब्राँकाइटिस होने का ख़तरा
बढ़ा सकता है। 15
ब्राँकाइटिस से जुड़ी समस्याएँ
न्युमोनिया
अगर खाँसी या सुस्ती जैसे आपके ब्राँकाइटिस के लक्षण कई
सप्ताह तक रहते हैं और आपको दम फूलने, बुख़ार जैसे लक्षण
या सीने अथवा छाती में दर्द महसूस हो, तो आपके डॉक्टर को
न्युमोनिया का संदेह हो सकता है।
ब्राँकाइटिस किसी भी व्यक्ति में न्युमोनिया का रूप ले सकता
है, लेकिन छुपी हुई बीमारियों या कमज़ोर रोग-प्रतिकार प्रणाली
से पीड़ित लोगों में गंभीर समस्या होने का ख़तरा ज़्यादा होता
है।
दमा का बढ़ना
अगर आपको दमा या कोई भी अन्य दीर्घकालिक फेफड़े की
बीमारी है, तो एक्यूट ब्राँकाइटिस बढ़ सकता है। दमा या
COPD से पीड़ित लोगों के ब्राँकियल ट्यूब्स में पहले से थोड़ा
उत्तेजन होता है।
ब्राँकाइटिस इस उत्तेजन को और बढ़ा देता है, जिससे दमा का
दौरा पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।
ब्राँकाइटिस की पहचान और जाँच
एक्यूट ब्राँकाइटिस:
बीमारी के शुरुआती चरणों में, बताना मुश्किल होता है कि आपको सामान्य सर्दी हुई है या ब्राँकाइटिस। जब आप डॉक्टर के पास जाते हैं, तब डॉक्टर स्टेथोस्कोप द्वारा आपके फेफड़ों को सुनते हैं। एक्यूट ब्राँकाइटिस की पहचान अक्सर लक्षणों और शारीरिक परीक्षण के आधार पर होती है। इसमें आपके चिकित्सीय इतिहास और आपके फेफड़ों की जाँच शामिल है। आपके डॉक्टर आपके ऑक्सीजन स्तर को भी मापेंगे और आपकी नाड़ी, तापमान तथा आपके साँस लेने की रफ़्तार की जाँच करेंगे। इससे पता चलता है कि बीमारी कितनी गंभीर है।
सामान्य एक्स-रे
एक्यूट ब्राँकाइटिस में किये गये छाती के एक्स-रे अक्सर
सामान्य दिखते हैं या उनमें वायुमार्ग थोड़ा मोटा दिखाई देता है।
संक्रमणों की त्वरित जाँच
इन्फ्लुएंज़ा जैसे श्वसन संबंधी संक्रमणों के लिये जाँच करना
हमेशा आवश्यक नहीं होता, लेकिन फ्लू के मौसम में या
कोविड-19 जैसी महामारी के दौर में यह ज़रूरी हो सकता है। यह
संक्रमणों की तुरंत पहचान में सहायता करता है, ताकि जल्द
उपचार शुरू किया जा सके और बीमारी को फैलने से रोका जा
सके।
स्पायरोमेट्री
इस जाँच में ब्राँकाइटिस के मरीज़ों में फेफड़े की कार्यप्रणाली
का मूल्यांकन किया जाता है। इसमें अक्सर श्वसन मार्ग का
अस्थायी सँकरापन दिखाई देता है, जो कुछ सप्ताह में ठीक हो
जाता है।
प्रयोगशाला परीक्षण
बुख़ार होने पर रक्त परीक्षण किये जा सकते हैं। एक्यूट
ब्राँकाइटिस के कुछ मामलों में ये परीक्षण श्वेत रक्त
कोशिकाओं में हल्की वृद्धि दिखा सकते हैं।
आधुनिक जाँच
कुछ मामलों में, मल्टिप्लेक्स पीसीआर या प्रोकैल्सिटोनिन
स्तरों की मदद से यह तय किया जाता है कि ब्राँकाइटिस के
उपचार के लिये ऐंटीबायोटिक्स की ज़रूरत है या नहीं। इससे
बेहतर उपचार संबंधी फैसले लेने में मदद मिलती है।
क्रोनिक ब्राँकाइटिस:
क्रोनिक ब्राँकाइटिस की पुष्टि करने में सहायक परीक्षण हैं:
पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट
यह जाँच मूल्यांकन करती है कि आपके फेफड़े कितनी अच्छी
तरह काम कर रहे हैं।
छाती का एक्स-रे
ख़ास तौर पर बुज़ुर्गों के लिये और लक्षणों में न्युमोनिया का
संदेह होने पर महत्वपूर्ण।
ऑक्सीजन सैचुरेशन मेज़रमेंट
यह जाँच बताती है कि आपके रक्त में कितना ऑक्सीजन है,
जो फेफड़ों की कार्यप्रणाली के मूल्यांकन के लिये महत्वपूर्ण
है।
डिफरेंशियल (विशेषक) के साथ कम्प्लीट ब्लड काउंट
यह जाँच रक्त कोशिकाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे
सकती है, जिनसे उत्तेजन की जानकारी मिलती है।
स्प्यूटम कल्चर
बैक्टीरियल (जीवाणुजन्य) संक्रमण का संदेह होने पर, यह
जाँच संक्रमण पैदा करने वाले विशिष्ट बैक्टीरिया को पहचान
सकती है।
ब्राँकाइटिस की रोकथाम
ब्राँकाइटिस से बचने के लिये सर्दी और फ्लू से बचने पर ध्यान दें। निम्नलिखित आदतों का पालन करें7:
समय-समय पर अपने हाथ धोते रहें
हर साल फ्लू का टीका लगवायें
कीटाणुओं को फैलने से रोकने के लिये खाँसते समय अपने मुँह को ढँकें।
धूल और रसायन जैसे तकलीफ देने वाले पदार्थों से बचें; उनसे बचना संभव न हो, तो मास्क पहनें
भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचें
मास्क पहनें
धूम्रपान न करें और अप्रत्यक्ष धूम्रपान से बचें
अपनी रोग-प्रतिकार प्रणाली को स्वस्थ रखने के लिये स्वस्थ खायें और नींद पूरी करें
ब्राँकाइटिस का उपचार
एक्यूट ब्राँकाइटिस अक्सर ख़ुद को सीमित रखता है, यानि कि ज़्यादातर मामलों में बिना किसी विशिष्ट उपचार के कुछ सप्ताह के भीतर इसमें सुधार आता है। ऐसा इसलिये, क्योंकि ब्राँकाइटिस के ज़्यादातर मामले वायरस (विषाणु) से होते हैं, जिनका ऐंटीबायोटिक्स द्वारा असरदार उपचार नहीं हो पाता।
संभवतः आपके डॉक्टर आपको ब्राँकाइटिस के लिये दवा नहीं देंगे, जब तक कि दवा देना ज़रूरी न हो। लेकिन अगर आपके डॉक्टर को लगता है कि आपका ब्राँकाइटिस किसी बैक्टीरियल (जीवाणुजन्य) संक्रमण के कारण हुआ है, तो वे सहायता के लिये ऐंटीबायोटिक्स का सुझाव दे सकते हैं। 9
डॉक्टर लक्षणों या छुपे हुए कारण से राहत के लिये दवा दे सकते हैं:
- ऐंटीवायरल (विषाणुनाशक) दवाएँ: अगर आपका ब्राँकाइटिस फ्लू के कारण हुआ है, तो आपको जल्द ठीक करने के लिये ऐंटीवायरल दवाएँ दी जा सकती हैं।
- ब्राँकोडायलेटर्स: आपको साँस लेने में तकलीफ होने पर ये दवाएँ आपके श्वसन मार्ग को खोलती हैं।
- उत्तेजन-नाशक दवाएँ: कॉर्टिकोस्टेरोइड्स और आइबूप्रोफेन, पैरासीटामोल और नैप्रोक्सेन जैसी दवाओं का इस्तेमाल उत्तेजन कम करने के लिये किया जाता है।
- सिरप जैसी खाँसी-रोधक दवाएँ निरंतर खाँसी में आपके लिये सहायक हो सकती हैं।
- ऐंटीबायोटिक्स: ये दवाएँ अक्सर डॉक्टर द्वारा सुझाई नहीं जातीं, जब तक कि बीमारी का कारण बैक्टीरिया न हो।
ह्युमिडिफायर या गुनगुने पानी के शावर भी बलगम को ढीला करके श्वसन आसान बना सकते हैं।
लेकिन अगर आपको क्रोनिक ब्राँकाइटिस है, तो पल्मोनरी
रीहैबिलिटेशन (फेफड़ा संबंधी पुनर्सुधार) और दवाएँ आपके
लिये सहायक हो सकती हैं। यह एक कार्यक्रम है, जिसमें
श्वसन विशेषज्ञ आपको साँस लेने में आसानी और शारीरिक
गतिविधियों में सुधार के लिये व्यायाम करना सिखाते
हैं। 10,11,13,14
ब्राँकाइटिस से राहत
एक्यूट ब्राँकाइटिस के मरीज़ सामान्यतः जल्दी ठीक होते हैं। यह बीमारी अक्सर स्वस्थ लोगों में ख़ुद ठीक हो जाती है, लेकिन इसके कारण काम या स्कूल छूट सकता है। बेहद दुर्लभ मामलों में, हृदय या फेफड़े की समस्याओं या अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों में ब्राँकाइटिस बढ़ सकता है। 12
Reference
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