पीडिएट्रिक एस्मा (बच्चों का दमा) क्या है?
दमा एक दीर्घकालिक बीमारी है, जिसमें आपके बच्चे के फेफड़े ठंडे मौसम, पराग जैसे विभिन्न ट्रिगर्स के संपर्क में आने के कारण उत्तेजित हो जाते हैं। ऐसा होने पर, वायुमार्ग के भीतरी हिस्से में सूजन हो जाती है और ज़्यादा बलगम का उत्पादन होने लगता है और साथ ही वायुमार्ग के आस-पास की मांसपेशियों में जकड़न के कारण आपको साँस लेने में परेशानी होती है।1
दमा अक्सर बच्चों की कम उम्र में शुरू होता है और यह लड़कियों के मुक़ाबले लड़कों में ज़्यादा आम है।
सौभाग्य से, दमा के लक्षणों पर नियंत्रण के लिये और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिये असरदार उपचार विकल्प उपलब्ध हैं।

बच्चों में दमा कितना आम है?
दमा बच्चों को होने वाली एक सामान्य बीमारी है। हाल के डाटा में देखा जा सकता है कि दुनिया भर में,
6-14 वर्ष के लगभग 9-10% बच्चों को दमा है
भारत में दमा के कुल मामले 3.43 करोड़ हैं
जो कि विश्व के प्रकोप का 13.09% है।3
इसके होने की दर लड़कों में और शहरी इलाकों में स्पष्ट रूप से ज़्यादा है।5
इस स्थिति से प्रभावित बच्चों की संख्या समय के साथ बढ़ रही है।4,6,7
बच्चों के दमा के लक्षण
बच्चों को दमा होने पर उन्हें निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं:
बार-बार खाँसी।
लगातार घरघराहट (साँस लेते समय आने वाली सीटी जैसी तेज़ आवाज़), ख़ास तौर पर सोते समय या रोने अथवा हँसने जैसे गतिविधियों के कारण।
रात में या सुबह के समय दमा के लक्षणों का बढ़ना।
छाती में कसाव या साँस लेने में तकलीफ़, जैसेदम फूलना या हाँफना।
ठीक से न सोने के कारण के कारण थकान महसूस होना।
चिड़चिड़ा या आसानी से ग़ुस्सा आनेवाला व्यवहार।
ये लक्षण मामूली से लेकर गंभीर रूप ले सकते हैं। कई बार, बढ़ते लक्षण गंभीर स्वास्थ्य संबंधी ख़तरेपैदा कर सकते हैं, जो बीमारी के बढ़ने का संकेत है। इस दौरान दम फूलने, खाँसी (ख़ास तौर पर रात को), सुस्ती, व्यायाम की कम सहनशीलता जैसे लक्षण हो सकतेहैं। अगर आपके बच्चा इनमें से किसी भी लक्षण से पीड़ित है, तो तुरंत चिकित्सीय सहायता लेना ज़रूरी है। 4
पीडिएट्रिक दमा के ट्रिगर्स (कारक)
वायरल (विषाणुजन्य) संक्रमण
वायरस जैसे रोगाणु फेफड़े के मार्गों में संक्रमण पैदा कर सकते हैं।
वायरल संक्रमण से वायुमार्ग उत्तेजित हो जातेहैं, जिससे
घरघराहट होती है संभवतः दमा हो सकता है। 9
एलर्जन और उत्तेजक
आपके बच्चे को धूल और पराग कणों जैसी चीज़ों से एलर्जी हो
सकती है। अन्य कारकों में माइट्स, जानवरों की रूसी इत्यादि
शामिल हैं, जो उनके लक्षण पैदा कर सकते हैं। कुछ पर्यावरणीय
कारक, जैसे वायुप्रदूषण, गैसें, कॉइल्स सेतेज़ दुर्गंध, खाना
बनानेकी गंध, स्प्रे, या धुआँ आपके बच्चेके वायुमार्ग को
उत्तेजित कर सकता है और उनके लक्षण बढ़ा सकता है।
व्यायाम
शारीरिक गतिविधि (थकाने वाला खेल या व्यायाम) कई बार
घरघराहट, खाँसी का कारण बन सकती है और श्वास नलिका
पतली होने के कारण बच्चों में श्वसन संबंधी समस्याओं के साथ
सीनेमें कसाव।
तनाव और भावनाएँ
जब आपका बच्चा तनाव महसूस करता है, उसका दम फूलने लग
सकता है और उसके लक्षण बढ़ सकते हैं।1,4,10
बचपन के दमा के जोखिम के कारक
आपके बच्चे को दमा होने की संभावना बढ़ाने वाले कारकों में निम्नलिखित शामिल हैं:
वायरल (विषाणुजन्य) संक्रमण दमा के विकास और वृद्धि, दोनों में काफी प्रभाव डालते हैं। अगर आपके बच्चे को बहुत ज़्यादा वायरल संक्रमण होते हैं, तो उसे दमा होनेकी संभावना बढ़ सकती है।9,18
पहले हो चुकी एलर्जिक प्रतिक्रिया, जैसे खाने की एलर्जी।
दमा या एलर्जी का पारिवारिक इतिहास।
अत्यधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहना।
ज़्यादा वज़न होना।
सक्रिय श्वसन संबंधी समस्याएँ होना, जैसे कि राइनाइटिस।
सक्रिय श्वसन संबंधी समस्याएँहोना, जैसेकि राइनाइटिस।
गर्भावस्था के दौरान और बचपन में तंबाकू के धुएँ के नज़दीक होना दमा होने की संभावना बढ़ा देता है। 4,11,12