इनहेलर क्या है
आमतौर पर इनहेलर का संबंध दमा से होता है, लेकिन दमा इनहेलर ही एकमात्र उपलब्ध इनहेलर नहीं हैं। इन उपकरण का इस्तेमाल फेफड़ों की बहुत-सी बीमारियों का इलाज करने के लिए किया जाता है, जैसे कि सीओपीडी, सिस्टिक फ़ाइब्रोसिस और दूसरी कई बीमारियाँ। इनहेलर एरोसोल या सूखे पाउडर के तौर पर दवा प्रदान कर सकते हैं जिसकी मुँह से साँस ली जा सकती है। इनहेलर के रूप में बहुत सी अलग अलग तरह की दवाएँ उपलब्ध हैं जिनमें तकलीफ़ या बीमारी के प्रकार के आधार पर अंतर हो सकता है।
वैसे तो इनहेलेशन थेरपी काफी समय सेमौजूद है और भारत में इसकी मौजूदगी का पता 4,000 साल पहले लगाया जा सकता है, लेकिन उपकरण के तौर पर इनहेलर सिर्फ़ 19वीं सदी में ही पेश किए गए। पहले प्रकार का इनहेलर असल में एक ग्लास बल्ब नेबुलाइज़र था। ये बड़े उपकरण थे जो आमतौर पर डॉक्टर के आफ़िस में इस्तेमाल किए जाते थे। ये उपकरण दवा की धुंध पैदा करते थे जिसे साँस से खींचा जा सकता था, बहुत कुछ आज इस्तेमाल किए जाने वाले नेबुलाइज़र की तरह जिन्हें बाद में इसी टेक्नोलॉजी से विकसित किया गया। 1938 में हैंड बल्ब नेबुलाइज़र आया। इसका आकार काफी छोटा था, लेकिन फिर भी इसमें कुछ खामियाँथीं और यह इस्तेमाल में असुविधाजनक था। लेकिन इन शुरुआती उपकरण के बिना कॉम्पैक्ट इनहेलर उपकरण की आधुनिक इनहेलर टेक्नोलॉजी का विकास संभव नहीं था। मीटर्ड-डोज़ इनहेलर (एमडीआई) पहला सफल इनहेलर उपकरण था जिसे 1956 में लॉन्च किया गया। यह पहला सचमुच कारगर और पोर्टेबल इनहेलर उपकरण था। वैसे तो पिछले कुछ सालों में इस उपकरण में सुधार किए गए हैं, खासकर प्रेशराइज़्ड कैनिस्टर की शुरुआत हुई है जिससे पीएमडी आई (प्रेशराइज़्ड मीटर्ड-डोज़ इनहेलर) बनाए गए हैं, लेकिन बुनियादी प्रणाली अभी भी वही है और डिज़ाइन में बहुत सी समानताएँ देखी जा सकती हैं। इनहेलर में समय के साथ सुधार किए गए हैं और अब येडोज़ काउंटर के साथ भी आते हैं। आज बहुत से अलग-अलग प्रकार के इनहेलर उपलब्ध हैं और दुनिया भर में इनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। फेफड़ों को असर करनेवाली बीमारियों के लिए इनहेलर सबसे ज़्यादा सुझाए गए उपकरण हैं क्योंकि ये दवा प्रदान करने के सबसे कारगर तरीकों में से एक हैं। जहाँ तक इनहेलर के भविष्य का सवाल है, उन्हें और भी ज़्यादा कारगर बनाने के तरीके ढूँढने पर शोध जारी है।
इनहेलर के प्रकार
जब इनहेलर के प्रकार की बात आती है, तो आजकल इनहेलर कई अलग-अलग प्रकार में उपलब्ध हैं। मुख्य रूप से तीन प्रकार के इनहेलर हैं जिन्हें उनके काम करने के तरीके के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बाँटा गया है।
प्रेशराइज़्ड मीटर्ड-डोज़ इनहेलर (पीएमडीआई)
यह सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला इनहेलर है। इसमें एक प्रेशराइज़्ड कैनिस्टर होता है जिसमें दवा के साथ एरोसोल प्रोपलेंट मिला होता है। बटन दबाने पर यह मिश्रण स्प्रे के तौर पर बाहर आता है। इसकी बहुत संभावना है कि जब आप दमा इनहेलर के बारे में सोचते हैं, तो आपके दिमाग में मीटर्ड-डोज़ इनहेलर का ख्याल आता हो। मीटर्ड-डोज़ इनहेलर को आमतौर पर इनहेलर पम्प या दमा ,पम्प भी कहा जाता है क्योंकि ये पम्प की तरह ही काम करते हैं। इसलिए, अगर आप किसी को इनहेलर पम्प या दमा के लिए पम्प के बारे में बात करते हुए सुनें, तो आपको पता होना चाहिए कि इसकी बहुत ज़्यादा संभावना है कि वह मीटर्ड-डोज़ इनहेलर के बारे में बात कर रहा है।
वैसे तो मीटर्ड-डोज़ इनहेलर सरल प्रकार का होता है, लेकिन इसके लिए चलाने(एक्चुएशन) और साँस लेने (साँस के साथ हाथ) के बीच थोड़े तालमेल की ज़रूरत पड़ती है, जिसे करना इसका इस्तेमाल करने वाले सभी उम्र के ज़्यादातर लोगों के लिए मुश्किल हो सकता है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए। अगर तालमेल खराब हो, तो हो सकता है कि दवा की सही खुराक फेफड़ों तक न पहुँचे, बल्कि दवा की एक बड़ी मात्रा मुँह या गलेमें जमा हो जाए जिससे फ़ंगल इन्फ़ेक्शन हो सकता है। यह भी एक वजह है कि डॉक्टर इनहेलर का इस्तेमाल करने के बाद कुल्ला करने की सलाह देते हैं।
तालमेल की यह समस्या स्पेसर का इस्तेमाल करके दूर हो सकती है। स्पेसर एक ट्यूब जैसा उपकरण होता है जिसे इनहेलर में उस जगह जोड़ा जाता है जिसके अंदर दवा स्प्रे की जा सकती है। आमतौर पर स्पेसर का सुझाव मीटर्ड डोज़ इनहेलर का इस्तेमाल आसान और ज़्यादा असरदार बनाने के लिए दिया जाता है ताकि दवा की ज़्यादा खुराक बर्बाद हुए बगैर उसकी ठीक सेसाँस ली जा सके। जब स्पेसर वालेइनहेलर की बात आती है, तो तालमेल की ज़रूरत कम हो जाती है क्योंकि दवा की साँस लेने और सही खुराक पाने के लिए ज़्यादा समय मिलता है।
ड्राय पाउडर इनहेलर
ड्राय पाउडर इनहेलर दवा प्रदान करने के तरीके में मीटर्ड डोज़ इनहेलर से बहुत अलग होते हैं। इन इनहेलर में दवा एरोसोल के रूप में नहीं बल्कि सूखे पाउडर के रूप में होती है जिसकी साँस ली जा सकती है। अगर आप सोच रहे हैं कि आखिर सूखे पाउडर वाले इनहेलर क्यों डिज़ाइन किए गए, तो वजह यह है कि मीटर्ड-डोज़ इनहेलर के साथ पहले बताए गए तालमेल की समस्या थी। इन पर ज़्यादा ध्यान तब भी गया जब पर्यावरणीय वजहों से लोकप्रिय एरोसोल प्रोपलेंट सीएफसी पर रोक लगा दी गई क्योंकि उस समय कई मीटर्ड-डोज़ इनहेलर स्प्रे देने के लिए अब भी उनका इस्तेमाल करते थे (एमडीआई अब एचएफ़ए नाम के एक दूसरे प्रोपलेंट का इस्तेमाल करते हैं)। ड्राय पाउडर इनहेलर खुद कई प्रकार के हो सकतेहैं। इनमें डीपीआई शामिल हैं जो एक अकेली खुराक या बहुत-सी खुराकें देते हैं या इनमें रिज़रवॉयर प्रकार का सिस्टम होता है जो सूखेपाउडर को थोक में जमा रखता है।
हालाँकि, ड्राय पाउडर इनहेलर केअपने फ़ायदे और सीमाएँ हैं। उनके फायदों में उनका इस्तेमाल में आसान होना और पर्यावरण-अनुकूल होना शामिल है। लेकिन चूँकि यह फ़ॉर्मूलेशन सूखेपाउडर के रूप में आता है, इसलिए उमस वाले माहौल में इसके दूषित और खराब होने का खतरा रहता हैया अगर तापमान में बड़ा बदलाव हो, तो दवा की कम खुराक प्रदान की जाती है।
ब्रेथ-एक्चुएटेड (सांस-सक्रिय) इनहेलर (बीएआई)
ब्रेथ-एक्चुएटेड (सांस-सक्रिय) इनहेलर ऐसे इनहेलर हैं जो साँस लेने पर दवा छोड़ सकते हैं। ब्रेथ-एक्चुएटेड (सांस सक्रिय) मीटर्ड-डोज़ इनहेलर एमडीआई के फ़ायदों जैसे कि चुस्त बनावट, पोर्टेबिलिटी और कई खुराक रखने की क्षमता को मिलाते हैं, जबकि पीएमडीआई के मुख्य नुकसान यानी तालमेल की ज़रूरत को दूर करतेहैं। ब्रेथ एक्चुएटेड (सांस-सक्रिय) मीटर्ड-डोज़ इनहेलर इस्तेमाल के लिए तैयार होने पर आपको बस साँस लेनी है और ये उपकरण दवा छोड़ देगा। अध्ययनों से पता चला है कि अस्पताल की व्यवस्था में और रोगियों द्वारा खुद इस्तेमाल किए जाने की स्थिति में दमा के लिए सभी प्रकार के इनहेलर में से इसका इस्तेमाल करना सबसे आसान है।
जबकि ब्रेथ-एक्चुएटेड (सांस-सक्रिय) इनहेलर के अपने फ़ाय देहैं, लेकिन इसकी अपनी सीमाएँ भी हैं। चूँकि ये साँस लेने पर चालू होते हैं, इसलिए अगर साँस लेने के लिए लगाया गया ज़ोर पर्याप्त न हो, जो कि साँस की बीमारियों से पीड़ित कुछ लोगों केसाथ हो सकता है, तो दवा नहीं छोड़ी जाएगी। बीएआई का इस्तेमाल करीब 23-35 लीटर/मिनट के न्यूनतम इंस्पिरेटरी फ़्लो (साँस लेनेका ज़ोर) के साथ किया जा सकता है, जिससे ये बच्चों और बुजुर्गों समेत सभी उम्र के लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जानेके लिए सही हैं।
इनहेलर का इस्तेमाल क्यों करें
दमा और सीओपीडी जैसी साँस की समस्याओं के इलाज के लिए इनहेलर आखिरी सहारा नहीं बल्कि पहली पसंद की दवा है। विश्व भर में इनहेलर को साँस की ज़्यादातर समस्याओं के इलाज का सबसे असरदार, सुरक्षित और सुविधाजनक तरीका माना जाता है।
इनहेलर से दवा कुछ ही सेकंड में सीधे फेफड़ों में वायुमार्गों तक पहुँचती है, ठीक वहीं जहाँ उसे काम करना होता है और फिर राहत दिलाती है। दूसरी तरफ़, गोलियों और सिरप को निगलने की ज़रूरत पड़ती है जिसका मतलब है कि ये पहले पेट और खून के बहाव में पहुँचते हैं और उसके बाद फेफड़ों में जाते है। इस तरह से वे जल्द राहत नहीं दिलाते हैं।
इसके अलावा, साँस से ली जाने वाली दवा जैसा असर पैदा करने के लिए बड़ी खुराक की ज़रूरत पड़ती है।
चूँकि इनहेलर से दवा सीधे समस्या वाली जगह पहुँचती है, इसलिए ज़रूरी खुराक की मात्रा गोलियों और सिरप के मुकाबले बहुत ही कम होती है।
बहुत से लोगों की धारणा से अलग, इनहेलर के बहुत कम दुष्प्रभाव होते हैं क्योंकि शरीर में दवा की बहुत कम मात्रा जाती है। इसलिए, आप या आपका बच्चा बेफ़िक्र होकर इनहेलर का इस्तेमाल कर सकते हैं और वह सब कुछ कर सकते हैं जो आपको अच्छा लगता हैऔर जिससे आपको आनंद मिलता है।
इनहेलर का सही इस्तेमाल क्यों मायने रखता है
जबकि हमने बहुत से विकल्पों पर चर्चा की है जो पिछले कुछ सालों में अलग-अलग प्रकार के इनहेलर के विकास की बदौलत उपलब्ध हुए हैं, इनहेलर के सही इस्तेमाल के बारे में बात करना भी उतना ही ज़रूरी है। पिछले कुछ सालों में इनहेलर के गलत इस्तेमाल के बारे में कई अध्ययन हुए हैं, जिनसे पता चलता है कि इनहेलर का इस्तेमाल करने का सही तरीका जानना क्यों ज़रूरी है। इनहेलर के गलत इस्तेमाल को बीमारियों पर खराब नियंत्रण, बार-बार आपातकालीन कक्ष में जाने की ज़रूरत पड़ना और यहाँ तक कि अस्पताल में भर्ती होने के ज़्यादा खतरे से भी जोड़ा गया है। इसकी वजह यह है कि अगर आप इनहेलर का गलत तरीके से इस्तेमाल करते हैं, तो सही दवा वायुमार्गों और फेफड़ों तक नहीं पहुँचती है और शरीर केइन हिस्सों को वह इलाज नहीं मिलता हैजो उन्हें मिलना चाहिए। इसलिए, चाहे आखिर में अपने इलाज के लिए आप किसी भी प्रकार के इनहेलर का इस्तेमाल क्यों न करें, आपको इनहेलर के इस्तेमाल के सही तरीकों की जानकारी भी ज़रूर रखनी होगी ताकि आपको दवा का पूरा असर मिल सके।
