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क्या सीओपीडी पूरी तरह से ठीक हो सकता है?
सीओपीडीअफ़सोस कि सीओपीडी पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकता है, लेकिन आप सही इलाज से और अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर इसके लक्षणों पर काबू ज़रूर पा सकते हैं और अपने जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकते हैं।1
क्या सीओपीडी छूत की बीमारी है?
सीओपीडीसीओपीडी छूत की बीमारी नहीं है। आपको यह बीमारी किसी और से नहीं लग सकती। आमतौर पर सीओपीडी धूम्रपान से, बायोमास धुएँ के संपर्क में आने से, वायुप्रदूषण से या लंबे समय तक हानिकारक धुएँ के संपर्क में रहने से होता है। 2
क्या सीओपीडी आनुवंशिक है?
सीओपीडीअल्फ़ा-1 एंटीट्रिप्सिन डेफ़िशियेंसी नाम का एक विकार है जिसकी वजह से सीओपीडी हो सकता है। लेकिन ज़्यादातर लोगों में धूम्रपान से या फेफड़ों को उत्त्तेजित करने वाली चीज़ों के संपर्क में आने से सीओपीडी होता है। 6
क्या धूम्रपान से सीओपीडी बिगड़ सकता है?
सीओपीडीहाँ, धूम्रपान से सीओपीडी बिगड़ सकता है। धूम्रपान से सीओपीडी के होने और उसके बिगड़ने दोनों का ही खतरा बहुत बढ़ जाता है, जो आखिरकार मृत्युदर में बढ़ोतरी की वजह बनता है। धूम्रपान नहीं करने वालों के मुकाबले धूम्रपान करने वालों में सीओपीडी होने की ज़्यादा संभावना रहती है और धूम्रपान की मात्रा बढ़ने के साथ खतरा भी बढ़ता जाता है। पैसिव स्मोकिंग (अप्रत्यक्ष धूम्रपान) भी एक जोखिम है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। सीओपीडी को सँभालने और रोकने के लिए धूम्रपान बंद करना ज़रूरी है। धूम्रपान बंद करने से सीओपीडी का बढ़ना कम हो सकता है और मृत्युदर में गिरावट आ सकती है। निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरपी (एनआरटी) से धूम्रपान छोड़ने में मदद मिल सकती है।7
क्या धूम्रपान नहीं करने पर भी सीओपीडी होने की संभावना है?
सीओपीडीहाँ, अगर आप धूम्रपान नहीं करते हैं, तो भी आपको सीओपीडी हो सकता है। धूम्रपान नहीं करने वालों में बायोमास धुएँ और काम की जगह पर हानिकारक चीज़ों के संपर्क में आने से और वायुप्रदूषण से सीओपीडी हो सकता है।3
अस्थमा और सीओपीडी में क्या फ़र्क है?
सीओपीडीअस्थमा और सीओपीडी दोनों ही आपके फेफड़ों पर असर करते हैं, लेकिन ये अलग-अलग बीमारियाँ हैं। अस्थमा आमतौर पर बचपन में शुरू होता है और आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारकों के मिश्रण की वजह से होता है। सीओपीडी आमतौर पर जीवन में देर से होता है, यह ज़्यादातर धूम्रपान, वायुप्रदूषण और बायोमास धुएँ के संपर्क में आने से होता है और समय के साथ बिगड़ता चला जाता है।4
क्या अस्थमा की वजह से सीओपीडी होता है?
सीओपीडीसीओपीडी सीधे अस्थमा की वजह से नहीं होता है, लेकिन कुछ हालातों में यह सीओपीडी होने का खतरा बढ़ा सकता है। जिन रोगियों को लंबे समय से या अनियंत्रित अस्थमा है, उनमें समय के साथ लगातार फेफड़ों के खराब होने और फेफड़ों के ठीक से काम नहीं करने की समस्याएँ आ सकती हैं जो सीओपीडी के लिए खतरे की वजहें हो सकती हैं।5
अगर मुझे सीओपीडी है, तो मुझे नियमित रूप से कौन से टेस्ट करवाने चाहिए?
सीओपीडीअगर आपको सीओपीडी है, तो नियमित रूप से टेस्ट करवाने सेआपकी बीमारी की निगरानी करने में मदद मिल सकती है। आपको निम्नलिखित टेस्ट करवाने चाहिए:
- स्पाइरोमेट्री: फेफड़ों के काम के इस बुनियादी टेस्ट से आपके सीओपीडी की गंभीरता का निदान और निर्धारण करने में मदद मिलती है।
- पीक एक्सपायरेटरी फ़्लो टेस्ट: इस टेस्ट में आपके साँस छोड़ने की रफ़्तार मापी जाती है जिससे समय के साथ आपके फेफड़ों के काम में होनेवाले बदलावों को देखने में मदद मिलती है।
- आर्टरियल ब्लड गैस टेस्ट: आर्टरियल ब्लड गैस (एबीजी) टेस्ट खून के बहाव में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर मापकर फेफड़ों के काम का आकलन करता है।
- छाती का एक्स-रे या सीटी स्कैन: ये इमेजिंग टेस्ट फेफड़ों केखराब होने या सीओपीडी से जुड़ी दूसरी जटिलताओं को पहचानने में मदद करते हैं। 8
अगर मुझेसीओपीडी है, तो मुझे कौन-सी सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
सीओपीडीसीओपीडी सेपीड़ित व्यक्तियों केलिए यह ज़रूरी हैकि वे निम्नलिखित बुनियादी सावधानियों का पालन करें:
- अपने डॉक्टर की सुझाई दवाओं का इस्तेमाल करें
- टीके लगवाना: नियमित रूप से फ़्लू और निमोनिया के टीके लगवाएँ, साथ ही कोविड-19 का टीका भी लगवाएँ जिससे आप ऐसे इन्फ़ेक्शन से बच सकें जो आपके सीओपीडी को बिगाड़ सकते हैं।
- सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनें: फेफड़ों को उत्तेजित करनेवाली चीज़ों और इन्फ़ेक्शन से बचाने के लिए भीड़-भाड़ वाले या प्रदूषित इलाकों में मास्क का इस्तेमाल करें।
- अपने हाथों को बार-बार धोएँ: इन्फ़ेक्शन की गुंजाइश कम करनेके लिए नियमित रूप से अपने हाथों को धोना बहुत ज़रूरी है, खास तौर पर फ़्लू के मौसम में और सार्वजनिक इलाकों में समय बिताने के बाद।
- फेफड़ों को उत्तेजित करनेवाली चीज़ों से दूर रहें: धुएँ, धूल, रासायनिक भाप और ठंडी हवा के संपर्क में आने से बचें क्योंकि इनसे साँस की समस्याएँ हो सकती हैं और आपके लक्षण तेज़ हो सकते हैं।
- हवा की गुणवत्ता के बारे में लगातार जानकारी रखें: हवा की गुणवत्ता पर नियमित रूप से नज़र रखें और प्रदूषण स्तरों में बढ़ोतरी होने पर घर ही में रहने की कोशिश करें।
- मौसम में बदलाव होने पर अपने डॉक्टर से सलाह लें।12
क्या तबीयत बेहतर लगनेपर दवाओंका सेवन बंद किया जा सकता है?
सीओपीडीनहीं, अगर आप बेहतर महसूस कर भी रहे हों, तो भी आपको अपने डॉक्टर से सलाह लिए बगैर अपनी दवा का सेवन बंद नहीं करना चाहिए। सीओपीडी लगातार रहनेवाली बीमारी है जिसके लिए लगातार देखभाल और प्रबंधन ज़रूरी होता है। अगर आप अपनी दवा लेना बंद कर देते हैं, तो इससे आपके लक्षण तेज़ हो सकते हैं या बुरी तरह से बिगड़ सकतेहैं। 13
क्या सीओपीडी होनेपर व्यायाम कर सकतेहैं?
सीओपीडीहाँ, अगर आपको सीओपीडी है, तो भी आप व्यायाम कर
सकते हैं। सीओपीडी के रोगियों के लिए शारीरिक गतिविधि एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है क्योंकि इससे
माँसपेशियों के काम में बहुत बढ़िया सुधार हो सकता है, रोगी
की व्यायाम करने की क्षमता बढ़ सकती है और
कुल मिलाकर उसके जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
अपने डॉक्टर से अपने लिए सही व्यायाम दिनचर्या और
विकल्पों के बारेमें पूछें। 14
सीओपीडी मेंसाँस केकौन-सेव्यायाम मददगार हो सकते हैं?
सीओपीडीसीओपीडी होने पर साँस लेना आसान बनाने में निम्नलिखित तरीके मददगार पाए गए हैं:
- पर्स्ड-लिप ब्रीदिंग: नाक से धीरे-धीरे साँस लें, फिर होठों को सिकोड़कर धीरे-धीरे साँस छोड़ें। इससेआपके वायुमार्गों को खुला रखने में मदद मिलती है और ऑक्सीजन के लेन-देन में सुधार हो सकता है।
- डायफ़्रामेटिक ब्रीदिंग: अपने डायफ़्राम का इस्तेमाल करके गहरी साँस लेनेपर पूरा ध्यान दें। इससे फेफड़ों की कुशलता बेहतर हो सकती है और साँस लेने का काम कम हो सकता है।
- एक्टिव एक्स्पायरेशन एंड इंसपायरेटरी मसल ट्रेनिंग: नियंत्रित रूप से साँस छोड़ने (एक्टिव एक्स्पायरेशन) का अभ्यास करने और साँस लेने में इस्तेमाल होनेवाली माँसपेशियों को मज़बूत करने (इंसपायरेटरी मसल ट्रेनिंग) से साँस लेने की माँसपेशियों की ताकत और साँस लेने की क्षमता बेहतर हो सकती है।
- एक्टिव सायकल ऑफ़ ब्रीदिंग टेक्नीक (एसीबीटी): एसीबीटी वायुमार्ग साफ़ करने का एक तरीका है जिसमें छाती को फुलानेवाले व्यायाम और साँस को नियंत्रित करने जैसे अलग अलग तरीकों का इस्तेमाल होता है।
References
सीओपीडीएलर्जिक राइनाइटिस को कैसे ठीक किया जा सकता है?
एलर्जिक राइनाइटिसइसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन आप उन चीजों से बचकर इसे नियंत्रित कर सकते हैं जो एलर्जी को ट्रिगर करती हैं (जैसे परागकण, धूल के कण, फफूंद, पालतू जानवर, या लकड़ी या आटे की धूल) । इसके अलावा, एंटीहिस्टामाइन, डिकॉन्जेस्टेंट, और नाक में डालने वाले खारे पानी के स्प्रे जैसी दवाओं का उपयोग करके भी इसे काबू में रखा जा सकता है।1
एलर्जिक राइनाइटिस कितने समय तक रहता है?
एलर्जिक राइनाइटिसएलर्जिक राइनाइटिस तब तक बना रहता है जब तक आप एलर्जी पैदा करने वाली चीजों (जैसे परागकण, धूल के कण, या जानवरों) के संपर्क में रहते हैं। हालांकि, दवाइयों की मदद से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।1
एलर्जिक राइनाइटिस किस वजह से होता है?
एलर्जिक राइनाइटिसएलर्जिक राइनाइटिस एलर्जी करने वाले तत्वों जैसे परागकण, धूल के कण, फफूंद, पालतू जानवरों, या लकड़ी और आटे की धूल के कारण होता है। 1
क्या एलर्जिक राइनाइटिस से अस्थमा (दमा) हो सकता है?
एलर्जिक राइनाइटिसएलर्जिक राइनाइटिस से पीड़ित मरीजों में अस्थमा होने का खतरा ज़्यादा होता है, क्योंकि एलर्जी के कारण ही अस्थमा के लक्षण भी बढ़ते हैं।2
क्या एलर्जिक राइनाइटिस में बुखार आ सकता है?
एलर्जिक राइनाइटिसनहीं, एलर्जिक राइनाइटिस से बुखार नहीं होता है। अगर किसी को एलर्जी के लक्षणों (जैसे नाक बहना या बंद नाक) के साथ बुखार भी है, तो यह बुखार शायद किसी और वजह से है, जैसे कि साइनस का इन्फेक्शन। एलर्जी के कारण साइनस इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है, जिससे बुखार हो सकता है, लेकिन खुद एलर्जी से बुखार नहीं आता है।3
क्या ठंडे मौसम के कारण एलर्जिक राइनाइटिस हो सकता है?
एलर्जिक राइनाइटिसहाँ, ठंडी हवा के कारण राइनाइटिस के लक्षण जैसे नाक बहना, नाक बंद होना और नाक में जलन महसूस हो सकती है। ऐसा ठंड के संपर्क में आने के तुरंत बाद होता है और गर्म जगह पर जाने से ठीक हो जाता है। यह ज़रूरी नहीं कि एलर्जिक राइनाइटिस ही हो, लेकिन यह समस्या एलर्जी वाले लोगों या सामान्य लोगों को भी हो सकती है। ठंडी हवा नाक की कोशिकाओं और नसों को उत्तेजित करती है, जिससे ये लक्षण दिखते हैं। इन्हें कुछ दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है। 4
क्या एलर्जिक राइनाइटिस और साइनसाइटिस (साइनस) एक ही हैं?
एलर्जिक राइनाइटिसनहीं, ये दोनों अलग-अलग हैं। एलर्जिक राइनाइटिस एक एलर्जी है जिसमें छींकें आती हैं, नाक बहती है और आँखों में खुजली होती है। वहीं, साइनसाइटिस साइनस (नाक के आसपास की हड्डियों में खोखली जगह) का इन्फेक्शन है, जो अक्सर साइनस के रास्ते में सूजन या रुकावट के कारण होता है। हालांकि, एलर्जिक राइनाइटिस के कारण नाक में सूजन और बलगम जमा हो सकता है, जिससे इन्फेक्शन की स्थिति बन सकती है और साइनसाइटिस हो सकता है। 5
References
एलर्जिक राइनाइटिस- https://www.nhs.uk/conditions/allergic-rhinitis/
- Bergeron C, Hamid Q. et al. Allergy Asthma Clin Immunol. 2005 Jun 15;1(2):81-7.
- https://www.medicalnewstoday.com/articles/fever-with-allergies#causes.
- Cruz AA, Togias A. Curr Allergy Asthma Rep. 2008 Apr;8(2):111-7.
- Slavin RG. J Allergy Clin Immunol. 1988 Nov;82(5 Pt 2):950-6.
क्या अस्थमा पूरी तरह ठीक हो सकता है?
अस्थमाअस्थमा को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता। हालांकि, सही इलाज से इसके लक्षणों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना और एक सामान्य, सक्रिय जीवन जीना संभव है।1
अस्थमा किस कारण होता है?
अस्थमाअस्थमा का सटीक कारण ज्ञात नहीं है। अस्थमा में फेफड़ों की वायुमार्गों में सूजन आ जाती है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है। यह परिवारों में पीढ़ी दर पीढ़ी चल सकता है, खासकर अगर माता-पिता या भाई-बहन जैसे करीबी रिश्तेदारों को यह बीमारी हो। यह उन लोगों में अधिक आम है जिन्हें एक्जिमा या हे फीवर जैसी एलर्जी होती है। शहरी क्षेत्रों में रहने से, जहां वायु प्रदूषण का स्तर आमतौर पर अधिक होता है, इससे संबंधित स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं। बचपन के कारक जैसे जन्म के समय कम वजन, समय से पहले जन्म, और तंबाकू के धुएं या प्रदूषण के संपर्क में आना भी इसका कारण बन सकता है। इसके अलावा, धूल के कण, फफूंद, रसायन या धुएं जैसे पर्यावरणीय कारक भी इसे बढ़ा सकते हैं। साथ ही, अधिक वजन या मोटापे से भी अस्थमा होने का खतरा बढ़ जाता है।2
अस्थमा का सबसे अच्छा इलाज क्या है?
अस्थमाइन्हेलर इसका सबसे आम, असरदार और सुझाया जाने वाला उपाय है। इन्हेलर दवा को सीधे फेफड़ों तक पहुंचाते हैं और लक्षणों से राहत दिलाने या उन्हें होने से रोकने में मदद कर सकते हैं।1
- प्रिवेंटर (बचाव करने वाले) इन्हेलर: ये हर दिन लिए जाते हैं ताकि वायुमार्ग की सूजन कम हो और लक्षण न दिखें।
- रिलीवर (राहत देने वाले) इन्हेलर: ये लक्षणों के उभरने पर तुरंत राहत देते हैं।
क्या अस्थमा संक्रामक (छूत की बीमारी) है?
अस्थमाअस्थमा सर्दी या फ्लू की तरह संक्रामक नहीं है। यह स्थिति फेफड़ों के वायुमार्ग को प्रभावित करती है, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है। यह किसी भी उम्र में हो सकता है, और इसके लक्षण एलर्जी या वायरल संक्रमण जैसे कारकों से शुरू होते हैं, लेकिन यह किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आने से नहीं फैल सकता जिसे यह बीमारी है।3
क्या अस्थमा वंशानुगत (आनुवंशिक) होता है?
अस्थमाहाँ, अस्थमा वंशानुगत हो सकता है। ऐसा माना जाता है कि अस्थमा के लगभग तीन-पांचवें मामले वंशानुगत होते हैं, जिसका अर्थ है कि अगर किसी के माता-पिता को अस्थमा या एलर्जी है, तो उनमें भी अस्थमा होने की संभावना अधिक होती है। अस्थमा होने की संभावना को बढ़ाने में जेनेटिक्स एक प्रमुख कारक है, खासकर अगर परिवार में इसका इतिहास रहा हो।4
क्या बिल्ली के बालों से अस्थमा होता है?
अस्थमाबिल्ली के बाल सीधे अस्थमा का कारण नहीं बनते हैं, लेकिन वे ऐसे एलर्जेन (एलर्जी पैदा करने वाले तत्व) ले जा सकते हैं जो अस्थमा से पीड़ित लोगों में लक्षणों को ट्रिगर कर सकते हैं। बिल्ली की रूसी (त्वचा की मृत कोशिकाएं), लार और मूत्र में मौजूद एलर्जेन प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं। जब व्यक्ति इन एलर्जेन को सांस के ज़रिए अंदर लेते हैं, तो उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिक्रिया कर सकती है, जिससे घरघराहट, खांसी और सांस लेने में कठिनाई जैसे अस्थमा के लक्षण हो सकते हैं। इसलिए, हालांकि बिल्ली के बाल मुख्य कारण नहीं हो सकते हैं, लेकिन वे ऐसे एलर्जेन ले जा सकते हैं जो संवेदनशील व्यक्तियों में अस्थमा को बढ़ा सकते हैं।5
अस्थमा को कैसे नियंत्रित करें?
अस्थमाअस्थमा को नियंत्रित करने के लिए, कुछ प्रमुख कदमों का पालन करना महत्वपूर्ण है:
- ट्रिगर्स से बचें: अपने ट्रिगर्स (जैसे: धूल, धुआं, परागकण, या पालतू जानवरों की रूसी) को पहचानें और अस्थमा को बढ़ने से रोकने के लिए उनसे बचें।
- दवा का उपयोग करें: इन्हेलर अस्थमा के लक्षणों को प्रबंधित करने में प्रभावी होते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने डॉक्टर द्वारा बताए गए अनुसार ही इन्हेलर का उपयोग करें।
- सक्रिय रहें: व्यायाम महत्वपूर्ण है, लेकिन शारीरिक गतिविधि के दौरान ट्रिगर्स से बचना सुनिश्चित करें और कोई भी नया व्यायाम शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।
- नियमित जांच कराएं: अपने अस्थमा की निगरानी करने और आवश्यकतानुसार अपनी उपचार योजना को समायोजित करने के लिए लगातार अपने डॉक्टर के पास जाएं।
अपनी दवा का प्रबंधन करके, ट्रिगर्स से बचकर, और एक योजना का पालन करके, आप अस्थमा को नियंत्रित कर सकते हैं और एक सामान्य जीवन जी सकते हैं।6
अस्थमा क्यों होता है?
अस्थमाअस्थमा क्यों होता है इसका सटीक कारण ज्ञात नहीं है। कई कारक अस्थमा होने का खतरा बढ़ा सकते हैं, जैसे:
- पारिवारिक इतिहास: माता-पिता या भाई-बहन जैसे करीबी रिश्तेदारों को अस्थमा होने से यह बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है।
- एलर्जी की स्थिति: जिन व्यक्तियों को हे फीवर या एक्जिमा जैसी एलर्जी होती है, उनमें अस्थमा होने का खतरा अधिक होता है।
- पर्यावरणीय कारक: वायु प्रदूषण, तंबाकू का धुआं, धूल, फफूंद और रसायनों के संपर्क में आने से अस्थमा होने का खतरा बढ़ सकता है।
- मोटापा: अधिक वजन या मोटापा भी अस्थमा की संभावना को बढ़ा सकता है।
- बचपन की घटनाएं: बचपन में कम वजन या वायरल संक्रमण जैसे कारक अस्थमा के जोखिम में योगदान कर सकते हैं।
ये कारक कुछ व्यक्तियों में अस्थमा को ट्रिगर करने के लिए विभिन्न तरीकों से एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं।6
References
अस्थमा- https://www.nhs.uk/conditions/asthma/treatment/
- https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/asthma
- https://acaai.org/asthma/asthma-101/who-gets-asthma/children/
- https://www.webmd.com/asthma/asthma-risk-factors
- https://www.medicalnewstoday.com/articles/cats-and-asthma#the-link
- https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/asthma/
बच्चों में अस्थमा का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट किए जाते हैं?
बाल चिकित्सा अस्थमाडॉक्टर बच्चों में अस्थमा का पता लगाने के लिए फेफड़ों की कार्यक्षमता की जांच करने वाले टेस्ट करते हैं। ये टेस्ट आमतौर पर 5 साल से ज़्यादा उम्र के बच्चों के लिए होते हैं। यहाँ मुख्य टेस्ट दिए गए हैं:
- स्पिरोमेट्री (Spirometry): यह टेस्ट वायुमार्गों में रुकावट की जांच करता है और यह भी देखता है कि इलाज के बाद सांस लेने में कितना सुधार हुआ है। यह अक्सर 5 साल से ज़्यादा उम्र के बच्चों के लिए सुझाया जाता है।
- पीक एक्सपायरेटरी फ्लो (Peak Expiratory Flow - PEF): यह टेस्ट मापता है कि बच्चा अपने फेफड़ों से कितनी तेज़ी से हवा बाहर निकाल सकता है।
5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ये टेस्ट करना मुश्किल होता है। इसलिए, डॉक्टर मुख्य रूप से लक्षणों, इलाज पर प्रतिक्रिया और अन्य संकेतों को देखकर यह तय करते हैं कि यह अस्थमा है या नहीं।1
बच्चों के अस्थमा के मरीज़ों के लिए अस्थमा एक्शन प्लान कितने उपयोगी होते हैं?
बाल चिकित्सा अस्थमाअस्थमा एक्शन प्लान (AAPs) अस्थमा वाले बच्चों के लिए बहुत मददगार होते हैं। ये योजनाएं लिखित निर्देश होती हैं जो माता-पिता और देखभाल करने वालों को यह मार्गदर्शन देती हैं कि अस्थमा का प्रबंधन कैसे करें, खासकर जब लक्षण बिगड़ रहे हों या दौरा पड़ रहा हो।2
क्या बच्चों का अस्थमा पूरी तरह ठीक हो सकता है?
बाल चिकित्सा अस्थमाअस्थमा एक लंबे समय तक चलने वाली स्थिति है जिसमें बार-बार घरघराहट, खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कई कारक इन लक्षणों को बढ़ा सकते हैं, जैसे श्वसन संक्रमण, एलर्जी पैदा करने वाले तत्व, धुआं या मौसम में बदलाव।
सही इलाज, ट्रिगर्स से बचाव और दौरे के दौरान क्या करना है, इसकी योजना बनाकर अस्थमा वाले ज़्यादातर बच्चे सामान्य और बिना लक्षणों वाला जीवन जी सकते हैं। हालांकि, भविष्य में लक्षण फिर से दिखाई दे सकते हैं। नियमित जांच महत्वपूर्ण है क्योंकि समय के साथ लक्षण बदल भी सकते हैं।1
क्या अस्थमा से पीड़ित बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं?
बाल चिकित्सा अस्थमाअस्थमा से पीड़ित बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं। सही इलाज, अस्थमा एक्शन प्लान का पालन करने, ट्रिगर्स से बचने और डॉक्टर के बताए अनुसार दवाओं का उपयोग करके, वे सक्रिय रह सकते हैं और रोज़मर्रा की गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं। नियमित जांच और अच्छा प्रबंधन इसकी कुंजी है।3
क्या अस्थमा वाले बच्चे खेलकूद में हिस्सा ले सकते हैं?
बाल चिकित्सा अस्थमाडॉक्टर द्वारा बताए गए सही इलाज के साथ, अस्थमा वाले बच्चे एक सक्रिय जीवन जी सकते हैं और खेलकूद में भी हिस्सा ले सकते हैं। कुछ गतिविधियों से अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं; इसलिए कोई भी नई शारीरिक गतिविधि शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।4
बच्चों में अस्थमा के क्या लक्षण होते हैं?
बाल चिकित्सा अस्थमाबच्चों में अस्थमा के लक्षणों में लगातार खांसी, घरघराहट, सांस फूलना और सीने में जकड़न शामिल है, खासकर गतिविधियों के दौरान, रात में या किसी ट्रिगर के संपर्क में आने पर।3
बच्चों में अस्थमा के क्या कारण हैं?
बाल चिकित्सा अस्थमाअस्थमा का सटीक कारण ज्ञात नहीं है। हालांकि, श्वसन संक्रमण, धूल और पालतू जानवरों की रूसी जैसे एलर्जेन, और धुआं और वायु प्रदूषण जैसे उत्तेजक तत्व बच्चों में अस्थमा के दौरे को बढ़ा सकते हैं।3
References
बाल चिकित्सा अस्थमा- https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC9045042/
- https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC9113391/
- https://www.webmd.com/asthma/children-asthma
- https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC4235445/
क्या ब्रोंकाइटिस संक्रामक (छूत की बीमारी) है?
ब्रोंकाइटिसहाँ, ब्रोंकाइटिस संक्रामक हो सकता है। एक्यूट (तीव्र) ब्रोंकाइटिस आमतौर पर मौसमी सर्दी, फ्लू या वायरस जैसे संक्रमणों के कारण होता है। यह कभी-कभी बैक्टीरियल संक्रमण के कारण भी हो सकता है। ज़्यादातर लोग कुछ दिनों या हफ्तों में एक्यूट ब्रोंकाइटिस से ठीक हो जाते हैं। दूसरी ओर, क्रोनिक (दीर्घकालिक) ब्रोंकाइटिस, जो अस्थमा और सीओपीडी जैसी बीमारियों के कारण होता है, संक्रामक नहीं है।1
क्या ब्रोंकाइटिस खतरनाक है?
ब्रोंकाइटिसब्रोंकाइटिस आमतौर पर खतरनाक नहीं होता है, लेकिन कुछ मामलों में यह समस्याएँ पैदा कर सकता है। एक्यूट ब्रोंकाइटिस के मरीज़ कुछ हफ्तों में अपने आप बेहतर महसूस करने लगते हैं। हालांकि, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस लंबे समय तक रहता है। इस स्थिति में, वायुमार्गों में सूजन के कारण सांस लेना मुश्किल हो जाता है और जटिलताएँ हो सकती हैं। यदि लक्षणों में कोई सुधार न दिखे, तो डॉक्टर से मिलना महत्वपूर्ण है।1
ब्रोंकाइटिस का इलाज कैसे करें?
ब्रोंकाइटिसब्रोंकाइटिस का इलाज इसके प्रकार पर निर्भर करता है। एक्यूट ब्रोंकाइटिस आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन खांसी की दवा का उपयोग किया जा सकता है, गर्म चाय पीना और पास में ह्यूमिडिफायर रखना मदद करता है। एंटीबायोटिक्स की ज़रूरत केवल बैक्टीरियल संक्रमण के लिए होती है। क्रोनिक ब्रोंकाइटिस का इलाज मुख्य रूप से लक्षणों को प्रबंधित करने पर केंद्रित होता है। इसमें धूम्रपान छोड़ना, वायुमार्गों को साफ करने के लिए दवाएं लेना, ऑक्सीजन थेरेपी का उपयोग करना और सिकुड़े होठों से सांस लेने जैसी साँस लेने की तकनीकें सीखना शामिल है।1
ब्रोंकाइटिस की खांसी को कैसे नियंत्रित करें?
ब्रोंकाइटिसकुछ कदम उठाने से मरीज़ों को बेहतर महसूस हो सकता है। आपको रोज़ाना पर्याप्त आराम करना चाहिए, और खूब सारे तरल पदार्थ पीने चाहिए। आप ह्यूमिडिफायर का भी उपयोग कर सकते हैं। आपको धूम्रपान नहीं करना चाहिए, और सिगरेट के धुएं (सेकेंड हैंड स्मोक) और धूल, धुएं जैसे जलन पैदा करने वाले पदार्थों से दूर रहना चाहिए। यदि खांसी बनी रहती है या और बिगड़ जाती है, तो आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। 3
ब्रोंकाइटिस कितने समय तक रहता है?
ब्रोंकाइटिसब्रोंकाइटिस अलग-अलग समय तक रह सकता है, यह इसके प्रकार पर निर्भर करता है। एक्यूट ब्रोंकाइटिस आमतौर पर कुछ हफ्तों के भीतर अपने आप ठीक हो जाता है, हालांकि लक्षण 3 सप्ताह से कम समय तक रह सकते हैं। क्रोनिक ब्रोंकाइटिस लंबे समय तक चलने वाला होता है और महीनों या उससे भी अधिक समय तक बना रह सकता है, खासकर अगर इसे ठीक से प्रबंधित न किया जाए।2 3
References
ब्रोंकाइटिस- https://www.nhlbi.nih.gov/health/bronchitis Accessed in May 2025
- https://www.cdc.gov/acute-bronchitis/media/pdfs/Bronchitis-508.pdf Accessed in May 2025
- https://www.lung.org/blog/bronchitis-frequently-asked-questions Accessed in May 2025
नेबुलाइज़र या नेबुलाइज़र सिस्टम क्या है?
नेबुलाइज़रक्या इन्हेलर और नेबुलाइज़र एक ही चीज हैं?
नेबुलाइज़रनेबुलाइज़ेशन किसे करवाना चाहिए?
नेबुलाइज़रक्या मैं घर पर नेबुलाइज़र का उपयोग कर सकता हूँ?
नेबुलाइज़रक्या नेबुलाइज़ेशन से दवा की लत लग जाती है?
नेबुलाइज़रक्या नेबुलाइज़ेशन के लिए दवा की ज़्यादा खुराक की ज़रूरत होती है?
नेबुलाइज़रक्या शिशुओं और छोटे बच्चों को नेबुलाइज़ेशन दिया जा सकता है?
नेबुलाइज़रक्या मैं अपने बच्चे को खुद नेबुलाइज़ेशन दे सकता हूँ?
नेबुलाइज़रएक बच्चे को कितनी बार नेबुलाइज़ेशन दिया जा सकता है?
नेबुलाइज़रक्या नेबुलाइज़ेशन से दवा की ओवरडोज़ हो जाती है?
नेबुलाइज़रक्या मुँह से ली जाने वाली दवाओं की तुलना में नेबुलाइज़ेशन के ज़्यादा दुष्प्रभाव होते हैं?
नेबुलाइज़रजब स्टेरॉयड या एंटीकोलिनर्जिक्स जैसी कुछ दवाएं दी जाती हैं, तो अगर धुंध त्वचा या आंखों के संपर्क में आती है तो कुछ दुष्प्रभावों की संभावना होती है। ऐसे मामलों में, माउथपीस का उपयोग करके और नेबुलाइज़ेशन के बाद गर्म पानी से नाक की सफाई और गरारे करके मुँह के क्षेत्र को साफ करके दुष्प्रभावों को रोका जा सकता है।
किसी भी प्रकार की नेबुलाइज़्ड दवा का उपयोग करने के बावजूद, गले और मुँह को पानी से धोना चाहिए। दूसरी ओर, मुँह से ली जाने वाली दवाओं के विपरीत, जहाँ दवा की अधिक मात्रा दी जाती है, नेबुलाइज़ेशन में प्रणालीगत दुष्प्रभाव बहुत कम होते हैं क्योंकि इसमें दवा की कम मात्रा दी जाती है।