ग़लत धारणा या सच्चाई
ग़लत धारणा
सच्चाई
- ग़लत धारणा
बचपन का अस्थमा उम्र बढ़ने के साथ चला जाता है
सच्चाईबड़े होने पर अस्थमा के लक्षण दोबारा आ सकते हैं।
कुछ मामलों में, जहाँ अस्थमा से पीड़ित बच्चों को सही इलाज मिलता है, उनमें समय के साथ सुधार आ सकता है और उनमें पराग या धूल जैसी कुछ चीज़ों की वजह से ट्रिगर होने वाले अस्थमा के दौरे पड़ने की गुंजाइश कम हो सकती है। जबकि उम्र बढ़ने के साथ अस्थमा के दौरे पड़ने की घटनाएँ कम हो सकती हैं, इस बीमारी के लक्षण बाद के जीवन में फिर से दिखाई पड़ सकते हैं
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अस्थमा से पीड़ित लोगों को व्यायाम करने से बचना चाहिए
सच्चाईनियमित रूप से व्यायाम करने से अस्थमा के लक्षण कम हो सकते हैं।
बहुत से लोगों का सोचना है कि व्यायाम करने से अस्थमा के लक्षण बदतर हो सकते हैं। लेकिन शारीरिक गतिविधि से फेफड़े मज़बूत होते हैं और अस्थमा से पीड़ित लोगों की सेहत में सुधार आता है। हालाँकि कोई भी ज़ोरदार व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बहुत ज़रूरी है क्योंकि वे कुछ सावधानियाँ बरतने की सलाह दे सकते हैं।
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अस्थमा की दवाओं की लत लग जाती है और समय के साथ उनका असर कम हो जाता है
सच्चाईअस्थमा की दवाएँ सुरक्षित होती हैं और इस बीमारी को सँभालने के लिए ज़रूरी हैं।
अस्थमा एक पुरानी बीमारी है जिसके लक्षणों को काबू में रखने के लिए लंबे समय तक दवाओं का सेवन करने की ज़रूरत पड़ती है। इन दवाओं में ब्रोन्कोडायलेटर और साँस के ज़रिए लिए जाने वाले (इन्हेल्ड) कॉर्टिकोस्टेरॉइड शामिल हैं। ब्रोन्कोडायलेटर वायुमार्ग के आस-पास की माँसपेशियों को शिथिल करके अपना असर दिखाते हैं। साँस के ज़रिए लिए जाने वाले कॉर्टिकोस्टेरॉइड वायुमार्ग में उत्तेजन या सूजन को भी कम करते हैं। इस बात पर ध्यान देना ज़रूरी है कि इन दवाओं की लत नहीं लगती है और अस्थमा को काबू में रखने के लिए ये बहुत ही ज़रूरी भूमिका निभाती हैं। हालाँकि डॉक्टर से पूछे बगैर इनका सेवन बंद कर देने से लक्षण और भी बदतर हो सकते हैं।
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अस्थमा जानलेवा नहीं है
सच्चाईअगर अस्थमा का इलाज ठीक से नहीं किया जाए, तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं।
अस्थमा एक पुरानी बीमारी तो है, लेकिन इसे सही दवाओं और साँस के व्यायामों से आसानी से सँभाला जा सकता है। अगर इसका इलाज नहीं किया जाए, तो अस्थमा के लक्षण बदतर हो सकते हैं और जानलेवा हालात पैदा हो सकते हैं। लेकिन यह मानना ज़रूरी है कि दवाओं के इस्तेमाल से अस्थमा को कारगर तरीके से सँभाला जा सकता है। जबकि अस्थमा के गंभीर दौरे पड़ने की घटनाएँ बहुत ही कम होती हैं, लेकिन इसके रोगियों को पराग, धूल, धुआँ, पालतू जानवरों की रूसी जैसे ट्रिगर पहचानने चाहिए। उनकी बीमारी को सँभालकर ऐसी घटनाओं को रोकना मुमकिन है
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अस्थमा का इलाज सिर्फ़ लक्षण दिखाई देने पर ही ज़रूरी है
सच्चाईअस्थमा को काबू में रखने के लिए डॉक्टर के बताए अनुसार नियमित रूप से दवा लेने की ज़रूरत पड़ती है।
रखरखाव दवाएँ लंबे समय तक साँस के ज़रिए ली जाने वाली दवाएँ होती हैं जो पुराने अस्थमा को सँभालने के लिए ज़रूरी होती हैं। ये वायुमार्ग में उत्तेजन को कम करती हैं और दौरे पड़ना रोकती हैं। इसके अलावा रिलीवर्स (राहत देने वाली दवाएँ) से अस्थमा के दौरों के दौरान तुरंत राहत मिलती है। आपको हमेशा पूरी लगन से ट्रीटमेंट प्लान का पालन करना चाहिए और उत्तेजन को कम करने के लिए रखरखाव दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए और अपने हेल्थकेयर प्रोवाइडर के बताए अनुसार तेज़ लक्षणों के लिए रिलीवर्स का इस्तेमाल करना चाहिए। अपने डॉक्टर की सलाह लेना या अपनी दवाएँ उनके बताए अनुसार लेना कभी ना भूलें। इस बात का ध्यान रखें कि भले ही कोई लक्षण ना हों, फिर भी अस्थमा को सँभालने के लिए अपने डॉक्टर के बताए लंबे समय के दवा सेवन प्लान का पालन करना बहुत ज़रूरी है।
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अगर घरघराहट नहीं है, तो मतलब अस्थमा नहीं है
सच्चाईभले ही घरघराहट ना हो, फिर भी अस्थमा हो सकता है।
सूजन और कसाव की वजह से वायुमार्ग सिकुड़ जाता है जिससे इसमें से सीटी जैसी आवाज़ निकलती है जिसे घरघराहट कहते हैं और यह अस्थमा के लक्षणों में से एक है। हालाँकि, अस्थमा की वजह से खाँसी, सीने में जकड़न और साँस की तकलीफ जैसे दूसरे लक्षण भी हो सकते हैं। घरघराहट आम तौर पर सुनाई दे जाती है, लेकिन घरघराहट के गंभीर दौरे सिर्फ़ स्टेथोस्कोप से ही सुनाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में जब लक्षण बहुत ही बदतर हो जाते हैं, तो वायु की गतिविधि में रुकावट आ सकती है। इससे अस्थमा होने के बावजूद घरघराहट नहीं भी हो सकती है। अगर लक्षण नहीं भी हों, तो भी डॉक्टर के बताए अनुसार दवाएँ लेते रहना ज़रूरी है।
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सभी अस्थमा से पीड़ित लोगों में एक जैसे लक्षण होते हैं
सच्चाईअस्थमा के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग होते हैं।
कुछ लोगों को खाँसी, घरघराहट और सीने में जकड़न जैसे बहुत से लक्षण होते हैं, जबकि दूसरे लोगों में सिर्फ़ एक लक्षण हो सकता है। यहाँ तक कि एक ही व्यक्ति में अलग-अलग लक्षण हो सकते हैं, जो कभी हल्के और कभी तेज़ होते हैं। इन अंतरों को समझने से हर व्यक्ति के अस्थमा को सँभालने में मदद मिलती है।
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अस्थमा के दौरों का पहले से अनुमान नहीं लगाया जा सकता या इन्हें रोका नहीं जा सकता
सच्चाईअस्थमा ट्रिगर की पहचान करना और उनसे बचना संभव है।
अस्थमा ट्रिगर हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होते हैं। आम कारकों में मौसम का बदलना, धुआँ, धूल, पालतू जानवर और ख़ास दवाएँ शामिल हैं। प्रदूषण, इन्फ़ेक्शन, ख़ास खाने-पीने की चीज़ें, फफूँद, सफाई का सामान और तेज़ गंध दूसरे ट्रिगर हैं। इसके अलावा इन्फ़ेक्शन बच्चों में अस्थमा के दौरों के सबसे आम ट्रिगर हैं। इन ट्रिगर को पहचानकर और इनसे बचकर अस्थमा के लक्षणों को बेहतर ढंग से सँभाला जा सकता है। इस बारे में अपने डॉक्टर से ज़रूर बात करें।
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डाइटरी सप्लीमेंट (आहार पूरकों) सेअस्थमा ठीक हो सकता है
सच्चाईअस्थमा के लिए आहार अनुपूरकों के उपयोग का समर्थन करने वाले बहुत कम प्रमाण हैं।
शोध से पता चलता है कि डाइटरी या हर्बल सप्लीमेंट का अस्थमा के लक्षणों पर मामूली सा असर पड़ता है। कुछ मामलों में आपके डॉक्टर सामान्य सेहत के लिए उनका सुझाव दे सकते हैं। आप जो भी दवाएँ लेते हैं, उनके बारे में अपने डॉक्टर को सूचित करें, जैसे कि विटामिन और हर्बल सप्लीमेंट
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अस्थमा संदर्भ
सच्चाई- ASTHMA. [Internet]. NHS.202. Available From: Click here
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- What is Allergic Asthma?. [Internet]. Asthma & Allergy Network. Available From:Click here
- What is Asthma?. [Internet]. Asthma+Lung UK. 2021. Available From:Click here
- Psychological Factors in Asthma. [Internet]. NIH NLM. 2008. Available From:Click here
- Dietary supplements and asthma: another one bites the dust. [Internet]. NIH NLM. 2007. Available From:Click here
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नेबुलाइज़ेशन के साथ इस्तेमाल की जाने वाली दवा की वजह से लत लग जाती है
सच्चाईनेबुलाइज़ेशन लत की वजह नहीं बनती। नेबुलाइज़र में उन्हीं दवाओं का इस्तेमाल होता है जो टैबलेट या सिरप में पाई जाती हैं, बस नेबुलाइज़र में ये तरल रूप में होती हैं। नेबुलाइज़र में यह तरल धुंध में बदल जाता है ताकि इसकी साँस आसानी से ली जा सके। इस तरीके से दवा को सीधे फेफड़ों तक पहुँचने में मदद मिलती है। अपने डॉक्टर के बताए अनुसार नेबुलाइज़र का इस्तेमाल करना सुरक्षित है और इसकी आदत नहीं पड़ती।
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नेबुलाइज़र के बहुत से दुष्प्रभाव होते हैं
सच्चाईनेबुलाइज़र में दवा की कम खुराक का इस्तेमाल किया जाता है, जो धुंध या एरोसोल में बदल जाती है ताकि सीधे फेफड़ों में इसकी साँस ली जा सके, यानी इसके कम दुष्प्रभाव होते हैं। मुँह से ली जाने वाली दवाओं (गोलियाँ या सिरप) के लिए ज़्यादा खुराक की ज़रूरत पड़ती है और ये शरीर में फैलने से पहले पेट से होकर जाती हैं, जबकि नेबुलाइज़र दवा इससे बिल्कुल अलग है, यह ठीक वहीं काम करती है जहाँ इसकी ज़रूरत होती है।
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नेबुलाइज़ेशन जितने लंबे समय तक होगा, तबीयत में सुधार उतना ही बेहतर होगा
सच्चाईनहीं, लंबे समय तक नेबुलाइज़ करने का मतलब यह नहीं है कि बेहतर नतीजे मिलेंगे। नेबुलाइज़ करने की अवधि आपके डॉक्टर द्वारा बताए समय के मुताबिक होनी चाहिए। आम तौर पर जेट नेबुलाइजर का इस्तेमाल 10-15 मिनट के लिए किया जाता है। इससे ज़्यादा देर तक नेबुलाइज़ करने से फ़ायदा नहीं होता है। दवा के कप के खाली होने का इंतज़ार मत करें। थोड़ा तरल हमेशा बचा रह जाता है और यह बची मात्रा आपकी दवा की कुल खुराक में शामिल होती है।
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नेबुलाइज़र काम करने में बहुत ज़्यादा समय लेते हैं
सच्चाईनेबुलाइजर तेज़ी से काम करते हैं क्योंकि दवा सीधे फेफड़ों तक पहुँचती है जिसकी वजह से ये गोलियों या सिरप के मुकाबले जल्दी असर दिखाते हैं।
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नेबुलाइजर दवा बर्बाद करते हैं और सही खुराक देने से चूक जाते हैं
सच्चाईमाउथपीस का सही तरीके से इस्तेमाल करने या कसकर बैठने वाला मास्क पहनने से पूरी खुराक आपके फेफड़ों तक पहुँचती है जिससे आपको जल्द राहत मिलती है।
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शिशुओं और छोटे बच्चों के लिए नेबुलाइज़र का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता
सच्चाईनेबुलाइज़र शिशुओं और छोटे बच्चों के लिए कारगर होते हैं। उनके लिए धुंध को साँस से अंदर खींचना आसान होता है और उन्हें मुँह से ली जाने वाली दवाओं के मुकाबले कम खुराक की ज़रूरत पड़ती है जिसका मतलब है कि उनके लिए कम दुष्प्रभाव होते हैं।
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जब बच्चा रो रहा हो, तो नेबुलाइज़र का इस्तेमाल करना ठीक है
सच्चाईरोते समय बच्चा जल्दी-जल्दी और छोटी-छोटी साँस लेता है। इसका मतलब है कि ऐसे में नेबुलाइज़ करने पर वह साँस से ज़्यादा दवा अंदर नहीं खींचेगा। इसलिए नेबुलाइज़र का इस्तेमाल करने से पहले उसे चुप करा लेना बेहतर है।
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सिर्फ़ अस्थमा से पीड़ित लोग ही नेबुलाइज़र का इस्तेमाल करते हैं
सच्चाईनेबुलाइज़र सिर्फ़ अस्थमा के लिए नहीं होते हैं। इनसे ब्रोंकाइटिस, सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़), सिस्टिक फ़ाइब्रोसिस और ब्रोन्किएक्टसिस जैसी बीमारियों में बलगम के जमाव, घरघराहट और साँस लेने की समस्याओं में राहत मिलती है। ये ख़ास तौर पर शिशुओं, छोटे बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए अच्छे होते हैं जिन्हें दूसरे डिवाइस का इस्तेमाल करने में दिक्कत आती है। अगर आपके डॉक्टर नेबुलाइज़र का इस्तेमाल करने की सलाह दें, तो हमेशा इसका इस्तेमाल करें।
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नेबुलाइज़र के लिए माउथपीस के मुकाबले फ़ेस मास्क का इस्तेमाल करना बेहतर है
सच्चाईमाउथपीस अक्सर बेहतर होता है। यह दवा को आपकी त्वचा या आँखों को छूने नहीं देती है जिससे दुष्प्रभाव कम हो जाते हैं। इससे यह भी पक्का होता है कि दवा सीधे आपके फेफड़ों तक पहुँचे। अगर आप फ़ेस मास्क का इस्तेमाल करते हैं, तो मुँह से साँस लें, नाक से नहीं। नहीं तो दवा आपकी नाक में फँसी रह जाएगी और फेफड़ों तक नहीं पहुँचेगी।
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नेबुलाइज़र को सिर्फ़ तभी साफ करने की ज़रूरत है जब आप इसका इस्तेमाल करते हैं
सच्चाईइन्फ़ेक्शन से बचने के लिए नेबुलाइज़र का हर बार इस्तेमाल करने के बाद उसके हिस्सों को साफ़ करें, जैसे कि माउथपीस, मास्क, दवा का कप, फ़िल्टर और बैफ़ल। उन्हें हर रोज़ कीटाणुरहित करें। लेकिन आपको ट्यूबिंग को साफ़ करने की ज़रूरत नहीं है, इसे सही समय पर बदल दें।
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नेबुलाइज़र संदर्भ
सच्चाईनेब्युलाइज़र से जुड़ी आम गलतफहमियाँ – सच्चाई का खुलासा। [इंटरनेट]. ब्रीदफ्री। स्रोत:Click here
