COPD क्या है?
क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीस (COPD) एक फेफड़ों की बीमारी है, जो हवा के
बहाव में बाधा उत्पन्न करती है, जिससे साँस की तकलीफ़ होती है। यह समस्या क्रोनिक
(दीर्घकालिक) ब्राँकाइटिस (सूजे हुए और पतले श्वसन मार्ग), एम्फिसीमा (क्षतिग्रस्त हवा की
थैलियाँ), या दोनों के रूप में विकसित हो सकती है।
COPD से पीड़ित लोगों के फेफड़े क्षतिग्रस्त होते हैं, जो गाढ़े बलगम से बंद हो सकते हैं, जिसे
श्लेष्मा कहा जाता है। COPD सिगरेट पीने, बायोमास ईंधन जलाने, वायुप्रदूषण जैसे
हानिकारक कणों के संपर्क से होता है।
COPD से पीड़ित लोगों को न्युमोनिया, दिल की ख़राबी और ज़्यादा घबराहट जैसी अन्य
स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। 1
COPD के प्रकार
क्रोनिक (दीर्घकालिक) ब्राँकाइटिस: अगर किसी
को लगातार तीन महीनों तक बलगम पैदा करने वाली
खाँसी रहती है और ऐसा लगातार दो साल तक होता
है, तो इस स्थिति को क्रोनिक (दीर्घकालिक)
ब्राँकाइटिस कहा जाता है।
एम्फिसीमा: यह एक प्रकार का COPD है, जिसमें
फेफड़ों के टिशू में मौजूद हवा की थैलियाँ अपना
लचीलापन खो देती हैं, जिससे लक्षण उत्पन्न होते
हैं। 2
क्रोनिक ब्राँकाइटिस एम्फिसीमा के साथ मौजूद हो सकता है या मरीज़ को दोनों बीमारियाँ अलग-अलग हो सकती हैं।
COPD के जोखिम के कारक
कुछ गतिविधियों से श्वास मार्ग पतला हो सकता है और COPD का कारण बन सकता है।3
धूम्रपान: सिगरेट/बीड़ी पीना COPD का मुख्य कारण है। पहले धूम्रपान कर चुके लोगों को भी COPD हो सकता है।
अप्रत्यक्ष धूम्रपान: अन्य लोगों द्वारा किये जा रहे तंबाकू के धूम्रपान से अप्रत्यक्ष रूप से ली गयी धुएँ की साँस।
घरेलू प्रदूषण: चूल्हों से उठने वाला धुआँ और प्रदूषण श्वास नलिका और फेफड़ों में दीर्घकालिक सूजन पैदा कर सकता है।
कार्यस्थल पर संपर्क: काम पर रसायन, धुंध या धूल से संपर्क COPD का कारण बन सकता है।
COPD के लक्षण
दीर्घकालिक खाँसी: COPD से पीड़ित लोगों में लगातार रहने वाली खाँसी सामान्य है। इससे बलगम उत्पन्न हो सकता है, जो रंगहीन, सफ़ेद, पीला, हरा हो सकता है या उसमें ख़ून भी हो सकता है।
दम फूलना: यह शारीरिक गतिविधि के दौरान हो सकता है और समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ता है, और विकसित अवस्था में यह आराम के दौरान भी होता है।
घरघराहट: साँस लेते समय आने वाली तेज़ सीटी जैसी आवाज़। यह वायुमार्ग के पतले होने के कारण होता है।
थकान: साँस लेने में ज़्यादा मेहनत के कारण, सुस्ती और ऊर्जा की कमी हो सकती है।
सीने में जकड़न: सीने में तकलीफ़, जो शारीरिक गतिविधि के दौरान और बढ़ सकती है।
वज़न घटना: बिना कोशिश किये वज़न घटना (ख़ास तौर पर बाद के चरणों में)।
बार-बार होने वाला श्वसन संबंधी संक्रमण: अक्सर श्वसन संबंधी संक्रमण के कारण बीमार पड़ना।
सूजन: पैरों और टखनों में सूजन हो सकती है, जो फेफड़ों और हृदय पर दबाव बढ़ने के कारण होती है।
रोगनिदान
आपके फेफड़ों और संपूर्ण स्वास्थ्य की जाँच के लिये, डॉक्टर द्वारा निम्नलिखित क़दम उठाए जा सकते हैं:
चिकित्सीय इतिहास
आपके डॉक्टर बीमारी की पहचान के लिये आपसे निम्नलिखित सवालों के जवाब देने के लिये कहेंगे:
क्या व्यायाम करने पर या आराम करते समय आपका दम फूलता है?
क्या आपकी खाँसी में बहुत ज़्यादा बलगम/कफ निकलता है?
क्या आप धुम्रपान करते हैं?
क्या आप लंबे समय से धूल या वायु-प्रदूषकों के संपर्क में रहे हैं?
क्या आपको लंबे समय से खाँसी या घरघराहट हो रही है?
शारीरिक परीक्षण
आपके डॉक्टर COPD की पहचान के लिये आपकी जाँच में निम्नलिखित चरणों का पालन कर सकते हैं:
स्टेथोस्कोप की मदद से फेफड़ों और हृदय को सुनना।
आपकी नाक और गले की जाँच करना।
रक्तचाप, नाड़ी और ऑक्सीजन स्तरों की जाँच करना।
पाँवों और टखनों में सूजन की जाँच करना।
जाँच
डॉक्टर स्पायरोमेट्री नामक एक सामान्य परीक्षण
द्वारा तय करते हैं कि आपके फेफड़े कितनी अच्छी
तरह काम कर रहे हैं।
स्पायरोमेट्री फेफड़ों से खींची और छोड़ी जाने वाली
हवा की अधिकतम मात्रा की जाँच करता है।
आपके डॉक्टर कुछ अन्य परीक्षण भी कर सकते हैं, जैसे:
एट्रियल ब्लड गैसेज़ (ABGs)
ये परीक्षण रक्त में ऑक्सीजन और कार्बन
डायऑक्साइड स्तरों की जाँच के लिये किये जाते हैं।
छाती का एक्स-रे या छाती का सीटी स्कैन
इन इमेजिंग टेस्ट्स से COPD द्वारा फेफड़ों में हुए
संभावित बदलावों की जाँच की जाती है।
इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG या EKG)
यह परीक्षण दम फूलने के कारण के रूप में
आपकी हृदय की लय की जाँच करता है।
व्यायाम/पैदल चलने की जाँच
आपके डॉक्टर इसकी मदद से पता लगा सकते हैं कि
व्यायाम करते समय आपके रक्त में ऑक्सीजन स्तर
कम होता है या नहीं।
COPD की गंभीरता का स्तर आँकना
COPD समय के साथ बढ़ सकता है। इसके हल्के से गंभीर तक पहुँचने की रफ़्तार अलग-अलग व्यक्तियों के लिये अलग हो सकती है।4
COPD के चरणों का वर्गीकरण स्पायरोमेट्री टेस्ट के परिणामों के आधार पर किया जाता है, जो अक्सर किसी डॉक्टर के क्लिनिक या अस्पताल में किया जाता है। इन परीक्षणों में FEV1 और FVC मूल्यों की गणना की जाती है।
एक सेकंड में ज़ोर लगा कर छोड़ी गयी साँस की मात्रा (FEV1): इसमें पूरी साँस खींचने की स्थिति के बाद एक सेकंड में आपके द्वारा छोड़ी गयी हवा की मात्रा को मापा जाता है। स्वस्थ फेफड़ों और श्वास मार्गों के साथ, आप उतने समय में अपने फेफड़ों में मौजूद अधिकांश हवा को निकाल सकते हैं।
फोर्स्ड वाइटल कपैसिटी (FVC): इसका मतलब है पूरी साँस खींचने के बाद एक साँस में आपके द्वारा छोड़ी जाने वाली हवा की कुल मात्रा।
आपका FEV1/FVC अनुपात < 70% होने पर COPD की पुष्टि होती है। इसके बाद आपके डॉक्टर आपके COPD को चार में से एक चरण में रखते हैं - हल्का, मध्यम, गंभीर और बहुत गंभीर - जो कि आपकी उम्र के अनुसार आपके FEV1 स्कोर में गिरावट पर आधारित होता है।
FEV1/FVC अनुपात < 70% FEV1 ≥ 80%
ग्रेड 2: मध्यम
FEV1 /FVC अनुपात < 70% FEV1 अनुमानित
मूल्य के 50% से < 80% तक
ग्रेड 3: गंभीर
FEV1 /FVC अनुपात < 70% FEV1 अनुमानित
मूल्य के 30% से < 50% तक
ग्रेड 4: बेहद गंभीर
FEV1 /FVC अनुपात < 70% FEV1 अनुमानित
मूल्य के < 30% तक4,7,8
COPD का उपचार
COPD का उपचार मुख्यतः खाँसी और साँस की तकलीफ़ जैसे लक्षणों से राहत देने और अन्य श्वसन संक्रमण से सुरक्षा पर आधारित होता है। आपके डॉक्टर निम्नलिखित का सुझाव दे सकते हैं:
ब्राँकोडायलेटर्स:
ये दवाएँ श्वास मार्गों को आराम देती हैं। साँस लेने में आसानी के लिये, ब्राँकोडायलेटर्स को इनहेलर द्वारा
भीतर खींचा जाता है।
उत्तेजन-रोधक दवाएँ:
ये स्टेरॉइड्स हैं, जिन्हें इनहेलर्स द्वारा लिया जा
सकता है।
ऐंटीबायोटिक्स:
ये बार-बार संक्रमण के कारण आपके कमज़ोर
फेफड़ों को और नुकसान पहुँचने से बचा सकते हैं।
बैक्टीरियाई संक्रमण के उपचार के लिये, आपके
डॉक्टर के सुझाव पर ऐंटीबायोटिक्स की ज़रूरत पड़
सकती है।
ऑक्सीजन की आपूर्ति:
अगर आपके रक्त में ऑक्सीजन स्तर कम है
(हाइपॉक्सेमिया), तो आपको आपके फिज़िशियन के
सुझावों के अनुसार ऑक्सीजन स्तर में सुधार के लिये
एक पोर्टेबल ऑक्सीजन टंकी की ज़रूरत पड़ सकती
है।
एक्सपेक्टोरंट्स:
ये उत्पाद बलगम को पतला करने में सहायक होते हैं,
ताकि आप ज़्यादा आसानी से खाँस कर उसे निकाल
सकें।
पुनर्सुधार:
पल्मोनरी (फेफड़ा संबंधी) पुनर्सुधार कार्यक्रम
हँफनी कम करने, जीवन की कुल गुणवत्ता बढ़ाने और
व्यायाम करने तथा दैनिक काम करने की क्षमता में
सुधार लाने की तकनीकें सिखा कर सहायता कर
सकते हैं।
टीकाकरण:
फ्लू और न्युमोनिया की रोकथाम के लिये टीका
लगवाना बेहद महत्वपूर्ण है। आपको COPD होने पर श्वसन संक्रमण ज़्यादा ख़तरनाक होते हैं।4
COPD को बढ़ने से रोकने के उपाय
COPD के विकास को धीमा करने के कई उपाय हैं।
निम्नलिखित चरण COPD से होने वाली समस्याओं की रोकथाम में आपकी सहायता कर सकते हैं।4,6:
स्वस्थ आहार लें और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।
अगर आपको डिप्रेशन (विषाद) है, तो अपने डॉक्टर से बात करें।
धुम्रपान मुक्ति कार्यक्रमों में हिस्सा लें।
व्यावसायिक धूल और रासायनिक संपर्क से बचने के उपायों के लिए डॉक्टर की राय लें।
धुएँ के संपर्क से बचें या धुम्रपान बंद करें।
COPD सेहोनेवाली जटिलताएँ
COPD अक्सर अन्य बीमारियों के साथ होता है, जिसके कारण यह ज़्यादा ख़राब होता है।
COPD से पीड़ित लोगों में सामान्य हृदय-संबंधी समस्याएँ:
दिल की ख़राबी
कोरोनरी धमनी रोग (हृदय को रक्त की आपूर्ति करने वाली रक्तवाहिनियों का पतला होना)
अनियमित धड़कनें
उच्च रक्तचाप
फेफड़ों का कैंसर और ब्राँकिएक्टेसिस (श्वास मार्ग को नुकसान) भी COPD के मरीज़ों में सामान्य हैं।
ऑस्टियोपोरोसिस (कमज़ोर हड्डियाँ) और डिप्रेशन तथा घबराहट जैसी मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएँ अक्सर होती हैं, लेकिन उनकी पहचान नहीं हो पाती, जिसके कारण स्वास्थ्य और ज़्यादा प्रभावित होता है।
एसिड रीफ्लक्स (GERD) अक्सर COPD के बढ़ने की संभावना बढ़ा सकता है और संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
अन्य समस्याओं में निम्नलिखित शामिल हैं
अन्य समस्याओं में निम्नलिखित शामिल हैं:
ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप ऐप्निया (नींद के दौरान श्वसन संबंधी समस्याएँ)
अनिद्रा (नींद न आना)
मसूड़ों की बीमारी और दाँतों का ख़राब स्वास्थ्य
मेटाबोलिक सिंड्रोम (दिल की बीमारी की ख़तरा बढ़ाने वाली स्थितियों का समूह)
डायबिटीज़
अनेमिया (लाल रक्त कोशिकाओं की कम संख्या)
Reference
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